IDFC First Bank शेयर में तूफानी तेजी! फ्रॉड के खुलासे के बावजूद निवेशकों ने क्यों खरीदा? जानें वजह

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AuthorNeha Patil|Published at:
IDFC First Bank शेयर में तूफानी तेजी! फ्रॉड के खुलासे के बावजूद निवेशकों ने क्यों खरीदा? जानें वजह
Overview

IDFC First Bank के शेयरों में गुरुवार को **4%** से ज्यादा की जोरदार तेजी देखी गई, जो फरवरी के बाद किसी एक दिन में सबसे बड़ी इंट्राडे बढ़त है। यह उछाल ऐसे समय में आया है जब बैंक ने **₹590 करोड़** के एक बड़े धोखाधड़ी (Fraud) का खुलासा किया था। इस बड़ी वित्तीय गड़बड़ी और कई एनालिस्टों द्वारा रेटिंग घटाए जाने के बावजूद शेयर में यह रिकवरी दिखी है।

फ्रॉड के बाद बाजार का शुरुआती उछाल

गुरुवार को IDFC First Bank के शेयरों ने बाजार को चौंका दिया। शेयर 4.07% चढ़कर ₹73.08 तक पहुंच गए। यह 3 फरवरी के बाद की सबसे बड़ी इंट्राडे बढ़त थी। इस दौरान ट्रेडिंग वॉल्यूम भी सामान्य से 9.2 गुना ज्यादा रहा, जो निवेशकों की बढ़ी हुई दिलचस्पी दिखाता है। यह तेजी इस बात का संकेत है कि मार्केट शायद बैंक के ₹590 करोड़ के फ्रॉड पर उसकी प्रतिक्रिया को पहले ही डिस्काउंट कर रहा है, खासकर हरियाणा सरकार के विभागों को पूरा प्रिंसिपल और इंटरेस्ट लौटाने के फैसले को। खबर लिखे जाने तक शेयर 3.7% ऊपर ₹72.8 पर ट्रेड कर रहे थे। यह मजबूती इसलिए भी अहम है क्योंकि इससे पहले इस साल IDFC First Bank के शेयर 14% गिर चुके थे, जबकि निफ्टी 50 में 2.3% की गिरावट आई थी।

₹590 करोड़ का फ्रॉड: बैंक का जवाब और असर

चंडीगढ़ ब्रांच में सरकारी जमाओं से जुड़ा ₹590 करोड़ का यह फ्रॉड, बैंक के अक्टूबर-दिसंबर तिमाही (FY2026) के ₹503 करोड़ के नेट प्रॉफिट से भी ज्यादा है। जवाब में, IDFC First Bank ने कहा है कि उसने हरियाणा सरकार के विभागों के कुल क्लेम किए गए प्रिंसिपल और इंटरेस्ट का 100%, यानी करीब ₹583 करोड़ का भुगतान कर दिया है। इस कदम का मकसद कंपनी के गवर्नेंस स्टैंडर्ड और ग्राहकों का भरोसा बनाए रखना है, लेकिन इसका सीधा वित्तीय असर पड़ा है। बैंक ने KPMG से एक स्वतंत्र फॉरेंसिक ऑडिट भी शुरू करवाया है और कर्मचारियों व अन्य पक्षों के खिलाफ पुलिस शिकायतें दर्ज कराई हैं। फरवरी 2026 तक, IDFC First Bank का मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग ₹60.4 बिलियन था। बैंक का प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) रेशियो (TTM) 35.6x से 38.35x के बीच बताया गया है, जो कुछ बड़े प्रतिस्पर्धियों की तुलना में ज्यादा है।

एनालिस्टों की राय में बदलाव और वैल्यूएशन की तुलना

इस फ्रॉड की घटना ने एनालिस्टों के सेंटीमेंट को प्रभावित किया है। Emkay Global ने फ्रॉड से जुड़े प्रोविजन और संभावित बिजनेस प्रभाव को ध्यान में रखते हुए FY26, FY27 और FY28 के लिए अपनी कमाई के अनुमानों को क्रमश: 30%, 13% और 9% तक घटा दिया है। BofA Securities ने IDFC First Bank की रेटिंग को 'Buy' से घटाकर 'Neutral' कर दिया है और प्राइस टारगेट को ₹95 से घटाकर ₹75 कर दिया है। इसका कारण निकट अवधि की दिक्कतें, जमाओं में संभावित गिरावट और फंडिंग लागत में बढ़ोतरी बताई गई है। इस डाउनग्रेड से नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIMs) पर दबाव और FY26/27 के लिए EPS अनुमानों में 13-14% की कटौती की चिंताएं सामने आई हैं। बड़े प्राइवेट बैंकों की तुलना में, IDFC First Bank का P/E रेशियो (35.6x से 38.35x) HDFC Bank (18.8x), ICICI Bank (20.42x) और Axis Bank (16.4x) से काफी ऊपर है, हालांकि यह Kotak Mahindra Bank (31.23x) के करीब है।

डी-लिस्टिंग और आगे की चिंताएं

शेयरों में इंट्राडे बढ़त के बावजूद, IDFC First Bank के सामने अभी भी बड़े जोखिम हैं। हरियाणा सरकार ने IDFC First Bank और AU Small Finance Bank दोनों को सरकारी कारोबार के लिए तत्काल प्रभाव से डी-एम्पैनल (De-empanel) कर दिया है। इस फैसले से बैंक की कुल जमाओं का 8-10% हिस्सा प्रभावित हो सकता है। बैंक की ओर से तुरंत किया गया भुगतान भले ही संबंधों को सुधारने के इरादे से किया गया हो, लेकिन यह फ्रॉड के सीधे वित्तीय प्रभाव को दर्शाता है। एनालिस्टों को आगे चलकर जमाओं में गिरावट का जोखिम, CASA (Customer Current Account Savings) में खलल के कारण फंडिंग लागत बढ़ना और NIMs पर दबाव की आशंका है। फ्रॉड की रकम का इतना बड़ा होना, जो तिमाही मुनाफे से भी ज्यादा है, और इसमें अंदरूनी मिलीभगत के आरोप, मैनेजमेंट के दावे के बावजूद कि यह एक अलग घटना थी, आंतरिक नियंत्रणों और गवर्नेंस की मजबूती पर सवाल खड़े करते हैं। ऐतिहासिक रूप से, ऐसे खुलासों के बाद स्टॉक में तेज गिरावट देखी गई है, जैसे 24 फरवरी 2026 को 16.18% की गिरावट आई थी।

भविष्य का अनुमान और ब्रोकरेज की मिली-जुली राय

एनालिस्टों का भविष्य का नजरिया बंटा हुआ है। कुछ रिपोर्ट्स में 'Buy' की सिफारिश और ₹81 से ₹97 के बीच औसत प्राइस टारगेट बताए जा रहे हैं, जो मौजूदा स्तरों से संभावित तेजी का संकेत देते हैं। वहीं, BofA जैसी फर्मों ने अपने लक्ष्य को कम करते हुए 'Neutral' का रुख अपनाया है। यह मतभेद इस बात को दर्शाता है कि भले ही बैंक की लॉन्ग-टर्म ग्रोथ की संभावना अच्छी हो, लेकिन फ्रॉड की घटना, उसके वित्तीय परिणाम और नियामक कार्रवाई से जुड़ी निकट अवधि की दिक्कतें इतनी महत्वपूर्ण हैं कि सावधानी बरतना जरूरी है। बाजार अब फॉरेंसिक ऑडिट के नतीजों और सरकारी संस्थाओं व अन्य बड़े जमाकर्ताओं का भरोसा वापस जीतने की बैंक की क्षमता पर बारीकी से नजर रखेगा।

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