धोखाधड़ी का बड़ा झटका और बैंक का जवाब
सोमवार को IDFC First Bank के शेयर 16% लुढ़क गए थे, जब ₹590 करोड़ की धोखाधड़ी का मामला सामने आया। यह गड़बड़ हरियाणा सरकार के कुछ खातों और बैंक की एक ब्रांच से जुड़ा था। बैंक के मैनेजमेंट ने निवेशकों को भरोसा दिलाया है कि यह एक 'अलग-थलग' मामला है और इससे बैंक के सिस्टम पर कोई बड़ा खतरा नहीं है। बैंक का कहना है कि उसके पास इतना प्रॉफिट (Profit) और लिक्विडिटी बफर (Liquidity Buffer) है कि वह इस झटके को झेल सके, जिसका अनुमान लगभग 1% नेट वर्थ (Net Worth) के बराबर लगाया जा रहा है। इस मामले में 4 कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है, पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई है और KPMG को फॉरेंसिक ऑडिट (Forensic Audit) का जिम्मा सौंपा गया है। बैंक उन खातों से पैसे वसूलने की कोशिश भी कर रहा है जो दूसरे संस्थानों में हैं। हरियाणा सरकार ने तुरंत IDFC First Bank और AU Small Finance Bank को सरकारी बिजनेस से बाहर कर दिया।
वैल्यूएशन, गवर्नेंस और सेक्टर का विश्लेषण
बाजार की नजर अब बैंक के वैल्यूएशन (Valuation) पर भी है। IDFC First Bank का करेंट P/E रेश्यो 41x से 46x के बीच है, जो बैंकिंग सेक्टर के औसत 10-20x से काफी ऊपर है। यह हाई वैल्यूएशन ऐसे समय में गवर्नेंस (Governance) की चिंताओं के चलते सवालों के घेरे में आ गया है। हालांकि, बैंक का 14-दिन का RSI 17.04 के स्तर पर है, जो बताता है कि शेयर फिलहाल ओवरसोल्ड (oversold) जोन में है। भारतीय बैंकिंग सेक्टर ने हाल के दिनों में अच्छा प्रदर्शन किया है, FY25 में NPA (Non-Performing Assets) कम हुए और प्रॉफिट बढ़ा। लेकिन IDFC First Bank के सामने इस गवर्नेंस इशू के चलते मुश्किलें बढ़ सकती हैं। कुछ एनालिस्ट्स (Analysts) ने टारगेट प्राइस (Target Price) कम किए हैं, पर Nomura ने 'Buy' रेटिंग बनाए रखते हुए ₹105 का टारगेट दिया है। Macquarie ने यह भी बताया है कि सरकारी डिपॉजिट्स (Deposits) बैंक के कुल डिपॉजिट्स का करीब 8-10% हैं।
एनालिस्ट्स की चिंताएं और जोखिम
इस धोखाधड़ी के कारण बैंक के इंटरनल कंट्रोल (Internal Control) और गवर्नेंस पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हरियाणा सरकार का फैसला इस बात का संकेत है कि कंप्लायंस (Compliance) और रिस्क मैनेजमेंट (Risk Management) प्रोटोकॉल कितने मजबूत थे। बैंक का 40x से ऊपर का P/E रेश्यो, ऐसे गवर्नेंस रिस्क के साथ, अब महंगा लगने लगा है, खासकर जब पब्लिक सेक्टर बैंक सिंगल-डिजिट P/E पर ट्रेड कर रहे हैं। सरकारी संस्थाओं से आने वाले डिपॉजिट्स, जो बैंक की कुल फंडिंग का करीब 8-10% हैं, उनके बाहर जाने का भी खतरा है। इसके अलावा, बैंक का ऑपरेटिंग एक्सपेंस (Operating Expense) 13.4% तक बढ़ा है और पिछले 3 सालों का रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) केवल 4.21% रहा है, जो बताता है कि ग्रोथ के लिए और कैपिटल की ज़रूरत पड़ सकती है, जिससे शेयरहोल्डर डाइल्यूशन (Shareholder Dilution) का खतरा बढ़ता है।
आगे क्या? भविष्य की राह
IDFC First Bank के शेयर के लिए स्थिरता इस बात पर निर्भर करेगी कि बैंक कितनी पारदर्शिता से काम करता है और क्या कदम उठाता है। फॉरेंसिक ऑडिट (Forensic Audit) से क्या निकलता है, यह देखना अहम होगा। डिपॉजिट्स (Deposits) पर कितना असर पड़ता है और गवर्नेंस में सुधार के क्या संकेत मिलते हैं, यह भी महत्वपूर्ण है। हालांकि कुछ एनालिस्ट्स ने टारगेट प्राइस कम किए हैं, पर औसत टारगेट अभी भी ₹82.46 के आसपास है, जो बताता है कि अगर समस्याएं सुलझाई गईं तो शेयर में तेजी आ सकती है। मैनेजमेंट ने नए फ्रॉड कंट्रोल्स (Fraud Controls) लागू करने और निवेशकों को आश्वस्त करने की बात कही है, लेकिन इन कदमों का असर देखना होगा। Nomura का ₹105 का टारगेट इस बात का संकेत है कि कुछ ब्रोकरेज फर्मों को बैंक की लॉन्ग-टर्म ग्रोथ पर भरोसा है।