फ्रॉड का खुलासा और मार्केट का रिएक्शन
IDFC First Bank की चंडीगढ़ ब्रांच में हुए इस ₹590 करोड़ के फ्रॉड ने बैंकिंग सेक्टर में हड़कंप मचा दिया है। शुरुआती जांचों में पता चला है कि यह गोरखधंधा पुराने मैनुअल तरीकों से बाहरी लोगों और बैंक के कर्मचारियों की मिलीभगत से चल रहा था। जैसे ही हरियाणा सरकार को अपने फंड ट्रांसफर के दौरान खातों में गड़बड़ी का पता चला, मामले का खुलासा हुआ।
इस घटना के तुरंत बाद, IDFC First Bank ने एक्शन लेते हुए 4 एम्प्लॉई को सस्पेंड कर दिया। साथ ही, बैंक ने KPMG से एक फोरेंसिक ऑडिट शुरू करवाया है और पुलिस में भी शिकायत दर्ज कराई है। बैंक ने अब तक हरियाणा सरकार को मूल राशि और ब्याज मिलाकर करीब ₹583 करोड़ वापस कर दिए हैं।
लेकिन इस फ्रॉड का असर मार्केट पर तुरंत दिखा। IDFC First Bank के शेयर में 20% तक की बड़ी गिरावट आई, जिससे बैंक की मार्केट वैल्यू में ₹14,000 करोड़ से ज्यादा की कमी आ गई। हरियाणा सरकार ने भी तुरंत बैंक के साथ अपना बिजनेस रोक दिया है, जो बैंक की इमेज के लिए एक बड़ा झटका है।
क्या IDFC First Bank के फंडामेंटल कमजोर हैं?
फिलहाल IDFC First Bank का P/E (प्राइस-टू-अर्निंग) रेशियो 32-36 के बीच है, जो AU Small Finance Bank (जिसका P/E 28-31 है) जैसे साथियों से ज्यादा है। वहीं, IDFC First Bank का ROE (रिटर्न ऑन इक्विटी) 4.2-4.3% है, जबकि AU Small Finance Bank का ROE 12% से ऊपर है। कुछ एनालिस्ट्स का मानना है कि शेयरहोल्डर फंड का इस्तेमाल करने में IDFC First Bank की एफिशिएंसी (दक्षता) कम हो रही है। हालांकि, बैंक की लोन ग्रोथ अच्छी है और NPA (नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स) भी सुधर रहे हैं, लेकिन बैंक पर ₹4.4 लाख करोड़ की बड़ी कंटिंजेंट लायबिलिटी (आकस्मिक देनदारियां) भी हैं।
RBI का सख्त रवैया और आगे क्या?
यह फ्रॉड ऐसे समय पर सामने आया है जब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) बैंकों के बोर्ड की निगरानी और मैनेजमेंट को मजबूत करने के लिए नए नियम बना रहा है। ऐसे में, इस घटना से सभी बैंकों, खासकर सरकारी फंड्स को संभालने वाले बैंकों पर RBI का फोकस और बढ़ सकता है। RBI कॉर्पोरेट गवर्नेंस को मजबूत करने के लिए गाइडलाइंस में बदलाव कर रहा है।
क्या हैं एनालिस्ट्स की राय?
इस घटना के बावजूद, कुछ एनालिस्ट्स IDFC First Bank को लेकर सतर्क लेकिन आशावादी बने हुए हैं। IDFC First Bank के लिए टारगेट प्राइस ₹62 से ₹100 के बीच हैं, जिनका औसत ₹79.43 है। कुछ ब्रोकरेज हाउसेज ने 'Buy' रेटिंग भी बरकरार रखी है। Nomura का अनुमान है कि इस फ्रॉड का FY26 के मुनाफे पर 20-28% तक असर पड़ सकता है।
RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा है कि ये किसी एक बैंक की व्यक्तिगत समस्याएँ हैं, लेकिन सेंट्रल बैंक स्थिति पर नजर रखे हुए है और जरूरत पड़ने पर व्यापक रेगुलेटरी बदलाव करने को तैयार है। IDFC First Bank का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि वह इस फाइनेंशियल नुकसान को कैसे सीमित करता है, अपने कंट्रोल सिस्टम को कितना मजबूत करता है और मार्केट का भरोसा कैसे दोबारा जीतता है। गवर्नेंस की समस्याएं मार्केट में हमेशा मुनाफे में मामूली गिरावट से ज्यादा गंभीर मानी जाती हैं।