IDFC First Bank ने सितंबर तिमाही के लिए शानदार नतीजे पेश किए हैं। बैंक का नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर **197%** बढ़कर **₹1,045 करोड़** पर पहुंच गया है। इस ग्रोथ के पीछे नेट इंटरेस्ट इनकम में **21%** की बढ़ोतरी और बैड लोन के लिए प्रोविजनिंग में **22%** की कटौती मुख्य वजह रही है।
मुनाफे की रफ्तार और प्रोविजनिंग में राहत
बैंक ने फाइनेंशियल ईयर 2027 की दूसरी तिमाही (30 सितंबर, 2026 तक) में दमदार प्रदर्शन किया है। पिछले साल इसी अवधि में बैंक का मुनाफा महज ₹352 करोड़ था, जो अब बढ़कर ₹1,045 करोड़ हो गया है। मुनाफे में इस जोरदार तेजी का बड़ा कारण प्रोविजनिंग में आई कमी है, जो सालाना आधार पर 22% घटकर ₹1,137 करोड़ रह गई।
वहीं, बैंक की मुख्य कमाई यानी नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) 21% बढ़कर ₹6,184 करोड़ पर पहुंच गई है। इसके अलावा, फीस और कमीशन से होने वाली अन्य आय भी 24.5% उछलकर ₹2,285 करोड़ दर्ज की गई। नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) 5.58% पर स्थिर बना हुआ है, जो चुनौतीपूर्ण दौर में बैंक की दक्षता को दर्शाता है।
एसेट क्वालिटी में सुधार और बिजनेस का विस्तार
बैंक की एसेट क्वालिटी में काफी सुधार देखने को मिला है। ग्रॉस NPA (बैड लोन) घटकर 1.32% पर आ गए हैं, जो पिछले साल इसी समय 1.86% थे। वहीं, नेट NPA भी बेहतर होकर 0.40% रह गए हैं, जो कर्ज वसूली और रिस्क मैनेजमेंट में सुधार का संकेत है।
ग्रोथ की बात करें तो, बैंक का कुल लोन बुक 30% बढ़कर ₹3,38,929 करोड़ और कुल डिपॉजिट 26% बढ़कर ₹3,48,583 करोड़ हो गया है। बैंक ने फंड जुटाने के लिए ₹34,390 करोड़ के फॉरेन करेंसी नॉन-रेसिडेंट (FCNR(B)) डिपॉजिट्स हासिल किए हैं। मैनेजमेंट के अनुसार, ये डिपॉजिट बैंक को अगले 3 से 5 साल तक लिक्विडिटी में फायदा पहुंचाएंगे और डोमेस्टिक मार्केट के मुकाबले करीब 1% सस्ती फंड कॉस्ट का लाभ भी देंगे।
आने वाले समय में निवेशकों की नजर इस बात पर होगी कि बैंक रिटेल सेविंग्स के बढ़ते कॉम्पिटिशन के बीच अपना डिपॉजिट बेस कैसे बनाए रखता है और क्रेडिट कॉस्ट पर कैसा नियंत्रण रखता है।
