तुरंत असर: शेयर 20% लुढ़का, मार्केट कैप में भारी गिरावट
IDFC First Bank के शेयर सोमवार, 23 फरवरी 2026 को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर 20% गिरकर अपने लोअर सर्किट ₹66.85 पर आ गए। यह गिरावट बैंक द्वारा चंडीगढ़ ब्रांच में ₹590 करोड़ के फ्रॉड का खुलासा करने के बाद आई। मार्च 2020 के बाद यह सबसे बड़ी एकदिनी गिरावट थी, जिसने बैंक के मार्केट कैपिटलाइजेशन (बाजार पूंजीकरण) में करीब ₹14,438 करोड़ की कमी ला दी।
यह फ्रॉड की रकम बैंक के तीसरी तिमाही (Q3 FY26) के नेट प्रॉफिट ₹503 करोड़ से भी ज्यादा है, जिसने निवेशकों की चिंताएं बढ़ा दीं। इसी बीच, हरियाणा सरकार ने IDFC First Bank और AU Small Finance Bank दोनों को सरकारी बिजनेस के लिए डी-एम्पैनल कर दिया, जो बैंक के भरोसे पर एक बड़ा झटका है। इस घटना के चलते AU Small Finance Bank के शेयरों में भी 7% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई।
गवर्नेंस पर सवाल और बैंकिंग सेक्टर की मजबूती
बाजार की यह तीखी प्रतिक्रिया भारतीय बैंकिंग सेक्टर की मजबूती के विपरीत है। भारतीय बैंक आम तौर पर अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं, जहां GNPA (ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स) का स्तर 2.31% (2025 में) है और कैपिटल बफर मजबूत हैं। शेड्यूल्ड कमर्शियल बैंकों ने FY2024-25 में ₹4.01 लाख करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया।
इस सकारात्मक माहौल में, IDFC First Bank का मौजूदा P/E रेश्यो (लगभग 45.61, फरवरी 2026 तक) प्रतिस्पर्धियों जैसे AU Small Finance Bank (TTM P/E करीब 29.94 से 33.27) की तुलना में काफी ज्यादा लगता है। IDFC First Bank का मार्केट कैपिटलाइजेशन करीब ₹71,855 करोड़ है, जो AU Small Finance Bank के थोड़े ऊंचे वैल्यूएशन की तुलना में जांच के दायरे में है। विश्लेषकों का कहना है कि ऐसे बाजार में जहां मजबूत बैलेंस शीट को अहमियत दी जाती है, गवर्नेंस में छोटी चूक भी बड़े वैल्यूएशन डिस्काउंट का कारण बन सकती है।
फ्रॉड का शक और इंटरनल कंट्रोल
एक ब्रांच में यह फ्रॉड, जो कथित तौर पर कर्मचारियों और बाहरी लोगों की मिलीभगत से हुआ है, IDFC First Bank के इंटरनल कंट्रोल्स (आंतरिक नियंत्रण) और ओवरसाइट मैकेनिज्म पर गंभीर सवाल खड़े करता है। फ्रॉड की रकम का बैंक के तिमाही मुनाफे से अधिक होना एक बड़ा रेड फ्लैग है।
IDFC First Bank का मैनेजमेंट यह दावा कर रहा है कि यह घटना अलग-थलग है और केवल हरियाणा सरकार के कुछ खातों तक सीमित है। लेकिन, इसके असर सिर्फ तात्कालिक वित्तीय नुकसान से कहीं ज्यादा हैं। हरियाणा सरकार का बैंक को डी-एम्पैनल करना उसकी प्रतिष्ठा के लिए गंभीर झटका है, जो बैंकिंग उद्योग में एक महत्वपूर्ण संपत्ति है।
RBI (भारतीय रिजर्व बैंक) ने हाल ही में फ्रॉड पर सख्त नियम और डिजिटल लेनदेन के लिए ₹25,000 तक के मुआवजे के ढांचे जैसी पहलें की हैं, जो ग्राहकों की सुरक्षा और वित्तीय अखंडता पर नियामक के बढ़ते फोकस को दर्शाती हैं। भारत में पहले हुए बैंकिंग फ्रॉड, जैसे ₹13,000 करोड़ का PNB घोटाला, यह याद दिलाते हैं कि कैसे आंतरिक हेरफेर संस्थानों को अस्थिर कर सकता है।
आगे की राह और एनालिस्ट की राय
IDFC First Bank ने KPMG से एक फोरेंसिक ऑडिट शुरू करवाया है, जिसके अगले 4-5 हफ्तों में पूरा होने की उम्मीद है। बैंक ने चार कर्मचारियों को सस्पेंड (निलंबित) भी कर दिया है। एनालिस्ट्स की राय बंटी हुई है। कुछ ब्रोकरेज जैसे Ashika ने इसे सिर्फ एक ऑपरेशनल लॉस कहकर इसके प्रभाव को कम करके आंका है, जबकि Nomura जैसे अन्य गवर्नेंस मानकों और ब्रांच-लेवल ओवरसाइट पर चिंता जता रहे हैं, जिससे ऑडिट पूरा होने तक स्टॉक पर दबाव बना रह सकता है।
UBS का अनुमान है कि यह फ्रॉड FY26 के प्रॉफिट पर 22% तक असर डाल सकता है, हालांकि कैपिटल पर इसका असर नेट वर्थ का लगभग 1% रहने की उम्मीद है। Morgan Stanley ने FY26 प्रॉफिट बिफोर टैक्स पर 20% की गिरावट का अनुमान लगाया है। Investec ने 'Buy' रेटिंग बनाए रखी है, लेकिन टारगेट प्राइस को ₹105 से घटाकर ₹92 कर दिया है। बैंक की फंड रिकवरी की क्षमता और जमाकर्ताओं का विश्वास बनाए रखना इस गवर्नेंस झटके के बाद महत्वपूर्ण होगा।
