IDFC First Bank में ₹590 करोड़ का फ्रॉड! शेयर **20%** धड़ाम, वैल्यूएशन पर उठे सवाल

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
IDFC First Bank में ₹590 करोड़ का फ्रॉड! शेयर **20%** धड़ाम, वैल्यूएशन पर उठे सवाल
Overview

IDFC First Bank के लिए बुरी खबर आई है। बैंक की चंडीगढ़ ब्रांच में **₹590 करोड़** का एक बड़ा फ्रॉड सामने आया है, जिसके खुलासे के बाद बैंक के शेयर में **20%** की भारी गिरावट दर्ज की गई।

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फ्रॉड का खुलासा और शेयर बाजार में हड़कंप

IDFC First Bank के शेयर 23 फरवरी, 2026 को 20% तक टूट गए। यह गिरावट बैंक की चंडीगढ़ ब्रांच में ₹590 करोड़ के कथित फ्रॉड की खबर के बाद आई। इस बड़ी खबर के चलते बैंक की मार्केट कैपिटलाइज़ेशन में ₹14,000 करोड़ से ज्यादा की गिरावट आई और शेयर करीब पांच महीने के निचले स्तर ₹66.80-₹70.04 पर पहुंच गए।

रिपेमेंट के बावजूद निवेशकों की चिंता

बैंक ने तुरंत एक्शन लेते हुए हरियाणा सरकार के विभागों को ₹583 करोड़ का रिपेमेंट कर दिया है। इसके बावजूद, शेयर में सिर्फ मामूली रिकवरी आई है और यह ₹70.50 के आसपास ट्रेड कर रहा है। यह दिखाता है कि मार्केट रिपेमेंट से ज्यादा बैंक के ऑपरेशनल कंट्रोल में खामियों पर ध्यान दे रहा है। बैंक के पास 16.22% का मजबूत कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो और बेहतर GNPA/NPA रेशियो (1.69%/0.53%) होने के बावजूद, इस फ्रॉड ने बैंक की जोखिम प्रबंधन (Risk Management) क्षमताओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

प्रीमियम वैल्यूएशन पर सवालिया निशान

IDFC First Bank की मौजूदा P/E रेशियो 37.55 से 50.83 तक है, जो सेक्टर के दूसरे बड़े बैंकों जैसे HDFC Bank (P/E 18.81), ICICI Bank (P/E 19.42), Axis Bank (P/E 15.37) और SBI (P/E 13.93) से काफी ज्यादा है। यह प्रीमियम वैल्यूएशन बड़े ग्रोथ की उम्मीदें दिखाता है, लेकिन इस फ्रॉड के बाद यह दबाव में आ गया है। भारतीय बैंकिंग इतिहास में Punjab National Bank और Yes Bank जैसे बड़े फ्रॉड के बाद शेयर में भारी गिरावट और निवेशकों का भरोसा टूटने में लंबा समय लगा है।

सरकारी बिजनेस से डी-इंपैनलमेंट और रेपुटेशनल डैमेज

हरियाणा सरकार ने इस घटना के बाद IDFC First Bank और AU Small Finance Bank को सरकारी बिजनेस से डी-इंपैनल कर दिया है। इससे बैंक की रेपुटेशन को नुकसान पहुंचा है और बड़े इंस्टिट्यूशनल डिपॉजिट्स खोने का खतरा बढ़ गया है, जो कुल डिपॉजिट्स का 0.5% है।

इंटरनल कंट्रोल्स की विफलता

₹590 करोड़ का यह फ्रॉड, बैंक के Q3FY26 की पूरी तिमाही के नेट प्रॉफिट ₹503 करोड़ से भी ज्यादा है। यह इंटरनल कंट्रोल्स और रिस्क मैनेजमेंट सिस्टम में गंभीर विफलता का संकेत देता है। भले ही बैंक कह रहा है कि यह फ्रॉड सिर्फ एक ब्रांच में हुआ है और इसमें कर्मचारियों की मिलीभगत है, लेकिन इतने बड़े पैमाने पर हुई गड़बड़ी बैंक की फ्रॉड डिटेक्शन और प्रिवेंशन मैकेनिज्म की प्रभावशीलता पर सवाल उठाती है।

आगे का रास्ता

फिलहाल, बैंक के लिए फोरेंसिक ऑडिट, रिकवरी की उम्मीदें और इंटरनल कंट्रोल्स को मजबूत करने की उसकी प्रतिबद्धता ही आगे का रास्ता तय करेंगी। इन्वेस्टर मैनेजमेंट की पारदर्शिता और भरोसे को फिर से बनाने की क्षमता पर बारीकी से नजर रखेंगे, खासकर सरकारी और बड़े संस्थागत डिपॉजिट्स को बनाए रखने और आकर्षित करने की क्षमता पर।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.