फ्रॉड का खुलासा, मार्केट में हड़कंप!
यह फ्रॉड तब सामने आया जब एक सरकारी विभाग को अपने अकाउंट में बड़ी रकम की कमी का पता चला। ₹590 करोड़ की यह गड़बड़ी बैंक की ऑपरेशनल इंटीग्रिटी पर सवाल खड़े करती है और इसी खुलासे ने मार्केट में हड़कंप मचा दिया। इस खबर के आते ही IDFC First Bank का शेयर 20% तक लुढ़क गया। हालांकि, बाद में शेयर में 1.3% की मामूली रिकवरी आई और यह ₹70.80 पर बंद हुआ। इस साल अब तक शेयर 18% गिर चुका है, जबकि निफ्टी 50 में इसी दौरान सिर्फ 2% की मामूली गिरावट आई है। इस घटना ने बैंक की मार्केट कैप को घटाकर करीब ₹60,151 करोड़ कर दिया है।
ब्रोकरेज की गिरी बिजली, अनुमानों में भारी कटौती
इस घटना के बाद ब्रोकरेज फर्मों ने अपने एनालिटिकल मॉडल में बड़े बदलाव किए हैं। Emkay Global ने 'Add' रेटिंग बरकरार रखी है, लेकिन FY26, FY27 और FY28 के लिए अर्निंग्स पर शेयर (EPS) के अनुमानों को 30%, 13% और 9% तक घटा दिया है। इसके साथ ही, ब्रोकरेज ने टारगेट प्राइस को 16% घटाकर ₹95 से ₹80 कर दिया है।
Motilal Oswal ने भी अपना टारगेट प्राइस ₹80 रखा है और 'Neutral' की सलाह दी है। फर्म का मानना है कि सबसे खराब स्थिति में, रिकवरी के प्रयासों के नतीजों पर निर्भर करते हुए, Q4 FY26 के प्रॉफिट बिफोर टैक्स (PBT) पर 56% तक का असर पड़ सकता है। ये बदलाव बताते हैं कि एनालिस्ट्स अब बैंक की री-रेटिंग की उम्मीदों को लेकर सतर्क हैं, भले ही यह फ्रॉड एक अलग घटना हो।
डिपॉजिट पर खतरा, मार्जिन रिकवरी में देरी की आशंका
सबसे बड़ी चिंता यह है कि इस फ्रॉड से सरकारी डिपॉजिट (जमा) पर असर पड़ सकता है। Emkay Global का कहना है कि हरियाणा सरकार, जो बैंक के कुल डिपॉजिट का करीब 0.5% (लगभग ₹1,450 करोड़) है, अपनी रकम निकाल सकती है। इसके अलावा, अन्य सरकारी खातों से भी आंशिक निकासी का जोखिम है, जो कुल डिपॉजिट का 8-10% तक हो सकते हैं।
ऐसी निकासी से बैंक की लिक्विडिटी (नकदी) पर दबाव बढ़ेगा और करंट अकाउंट सेविंग्स अकाउंट (CASA) की ग्रोथ धीमी पड़ सकती है। इससे बैंक की नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) को रिकवर करने की क्षमता पर भी असर पड़ेगा। कई बड़े बैंकों के विपरीत, जिनकी डिपॉजिट बेस डाइवर्सिफाइड है, IDFC First Bank की सरकारी जमाओं पर निर्भरता अब एक बड़ा जोखिम बन गई है।
आगे क्या?
एनालिस्ट्स IDFC First Bank से जांच की प्रगति और फंड रिकवरी को लेकर और स्पष्टता का इंतजार कर रहे हैं। Emkay Global का मानना है कि यह ऑपरेशनल लैप्स बैंक के लॉन्ग-टर्म के भविष्य को पटरी से नहीं उतारेगा, लेकिन बैंक को निवेशकों का भरोसा दोबारा जीतने के लिए डिपॉजिटर कॉन्फिडेंस, कैपिटल एडिक्वेसी और ऑपरेशनल कंट्रोल्स पर ध्यान देना होगा।