IDFC FIRST Bank ने बैंकिंग कामकाज में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का दायरा तेजी से बढ़ा दिया है। बैंक अब हर महीने करीब **15 लाख** लोन प्रोसेस कर रहा है, जो डिजिटल बैंकिंग में एक बड़ा बदलाव है।
डिजिटल बैंकिंग की नई क्रांति
बैंक के सीईओ वी. वैद्यनाथन ने बैंकिंग को 'न्यूक्लियर एनर्जी' जैसा पावरफुल बताते हुए कहा कि अब पुरानी मैन्युअल प्रक्रिया की जगह पूरी तरह से ऑटोमेटेड मॉडल ले रहा है। बैंक अब लोन बांटने के लिए GST रिटर्न जैसे डेटा पॉइंट्स का इस्तेमाल कर रहा है, जिससे उन लोगों तक पहुंच आसान हो गई है जिन्हें पहले औपचारिक बैंकिंग में जगह नहीं मिल पाती थी।
निवेशकों के लिए क्यों है यह जरूरी?
यह कदम बैंक के लिए ऑपरेशनल एफिशिएंसी बढ़ाने वाला साबित हो सकता है। लोन प्रोसेस करने की लागत कम होने से बैंक का कॉस्ट-टू-इनकम रेशियो सुधरने की पूरी उम्मीद है। हालांकि, निवेशकों की नजरें इस पर टिकी हैं कि क्या यह तेज रफ्तार बैंक की एसेट क्वालिटी पर असर डालेगी। क्या एसेट क्वालिटी और NPA का अनुपात आने वाले समय में काबू में रहेगा, यह देखना दिलचस्प होगा।
गवर्नेंस और रेगुलेशन का दौर
बैंक का मानना है कि टेक्नोलॉजी जितनी ताकतवर है, उतनी ही जिम्मेदारी भी लाती है। RBI जैसे रेगुलेटर्स कंज्यूमर प्रोटेक्शन को लेकर काफी सख्त हैं, ऐसे में एल्गोरिदम का पारदर्शी होना बहुत जरूरी है। इसके अलावा, ₹2,000 से ज्यादा के UPI ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट को लेकर बैंक का रुख डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम में अपनी धाक जमाने पर केंद्रित है। आने वाले क्वार्टर में लोन ग्रोथ और क्रेडिट कॉस्ट के आंकड़े ही तय करेंगे कि बैंक की यह तकनीक कितनी सटीक साबित हुई है।
