नतीजों पर एक गहरी नजर
IDFC FIRST Bank ने वित्तीय वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही (Q3 FY26) के अनऑडिटेड नतीजे जारी किए हैं, जो काफी उत्साहजनक हैं। बैंक का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट आफ्टर टैक्स 48.1% बढ़कर ₹50,254 लाख पर पहुंच गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह ₹33,943 लाख था।
इस मुनाफे में बढ़ोतरी की मुख्य वजह कुल आय में 12.7% का इजाफा रहा, जो ₹12,54,199 लाख तक पहुंच गई। बैंक की ब्याज से आय 11.5% बढ़ी, वहीं अन्य आय में 19.4% का तगड़ा उछाल देखा गया। ऑपरेटिंग प्रॉफिट में भी 15.6% की वृद्धि दर्ज की गई, जो ₹2,03,335 लाख रहा। टैक्स से पहले का प्रॉफिट (Profit Before Tax) तो 50.8% तक बढ़ गया।
एसेट क्वालिटी के मोर्चे पर भी IDFC FIRST Bank ने सुधार दिखाया है। ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPAs) घटकर 1.69% हो गए, जो पिछले साल 1.94% थे। हालांकि, नेट एनपीए मामूली बढ़कर 0.53% हो गया (पिछले साल 0.52%)। रिटर्न ऑन एसेट्स (annualised) 0.41% से सुधरकर 0.51% हो गया, जो बेहतर एसेट यूटिलाइजेशन का संकेत देता है।
स्टैंडअलोन एंटिटी के लिए बेसिक अर्निंग्स पर शेयर (EPS) 23.9% बढ़कर ₹0.57 हो गया, जो पिछले साल ₹0.46 था।
कंसॉलिडेटेड आधार पर देखें तो नेट प्रॉफिट 40.7% बढ़कर ₹47,865 लाख रहा, और बेसिक ईपीएस (EPS) 17.4% बढ़कर ₹0.54 हो गया।
क्या हैं चिंता की बातें?
एक महत्वपूर्ण वित्तीय आंकड़ा जिस पर निवेशकों की नजर रहेगी, वह है डेट-इक्विटी रेश्यो। Q3 FY26 में यह बढ़कर 0.34 हो गया है, जबकि Q3 FY25 में यह 0.21 था। हालांकि, यह आंकड़ा अभी भी बैंक के स्केल के हिसाब से मैनेजेबल माना जा रहा है। बैंक ने नए लेबर कोड लागू करने के कारण ₹65.36 करोड़ (स्टैंडअलोन) के अतिरिक्त इंपैक्ट का भी जिक्र किया है।
निवेशक आगे इस प्रॉफिट ग्रोथ की निरंतरता, एसेट क्वालिटी का प्रबंधन और बैंक की लेवरेज स्ट्रैटेजी पर बारीकी से नजर रखेंगे। ₹2,156.50 करोड़ के नॉन-डिफ़ॉल्टिंग लोन का अधिग्रहण और जेटपुर सोमनाथ टोलवे प्राइवेट लिमिटेड में हिस्सेदारी जैसी रणनीतिक चालें आने वाले समय में असर दिखाएंगी।