IDFC FIRST Bank ने ₹583 करोड़ का भुगतान कर ₹590 करोड़ के फ्रॉड केस में बढ़ाई राहत की ओर
IDFC FIRST Bank ने अपने निवेशकों के लिए एक अहम जानकारी दी है। बैंक ने हरियाणा सरकार के विभिन्न विभागों को ₹583 करोड़ का भुगतान किया है। यह भुगतान लगभग ₹590 करोड़ के एक संदिग्ध फ्रॉड मामले से जुड़ी जांच को सुलझाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। बैंक ने इस भुगतान को अपनी 'कस्टमर-फर्स्ट और प्रिंसिपल-बेस्ड अप्रोच' (customer-first and principle-based approach) का हिस्सा बताया है।
मजबूत वित्तीय सेहत के बीच समाधान
इन सबके बीच, बैंक ने अपनी वित्तीय सेहत के मजबूत होने का दावा किया है। 31 दिसंबर, 2025 तक, बैंक का कस्टमर बिज़नेस (Customer Business), जिसमें लोन और डिपॉजिट दोनों शामिल हैं, पिछले साल की तुलना में 22.6% बढ़कर ₹5,62,090 करोड़ पर पहुंच गया। वहीं, बैंक की एसेट क्वालिटी (Asset Quality) भी नियंत्रण में है। ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (GNPA) 1.69% और नेट नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (Net NPA) 0.53% पर हैं। इसके अलावा, कैपिटल एडिक्वेसी रेश्यो (CAR) 16.22% पर मजबूत बना हुआ है। Q3 FY26 के लिए बैंक का नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) 5.76% दर्ज किया गया।
₹590 करोड़ का फ्रॉड और सरकारी कार्रवाई
यह भुगतान फरवरी 2026 में सामने आए एक बड़े फ्रॉड से जुड़ा है। IDFC FIRST Bank ने तब चंडीगढ़ स्थित अपनी शाखा में लगभग ₹590 करोड़ के संदिग्ध फ्रॉड का खुलासा किया था। आरोप था कि बैंक कर्मचारियों ने हरियाणा सरकार के कुछ सरकारी खातों में अनधिकृत ट्रांजैक्शन (unauthorized transactions) किए थे। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए बैंक ने चार कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया था और पुलिस में FIR भी दर्ज कराई थी। इस घटना के तुरंत बाद, हरियाणा सरकार के वित्त विभाग ने IDFC FIRST Bank और AU Small Finance Bank को सरकारी कामकाज के लिए डी-एम्पेनल (de-empanel) कर दिया था और सभी सरकारी विभागों को इन बैंकों के साथ ट्रांजैक्शन रोकने का निर्देश दिया था।
आगे की राह और जोखिम
बैंक इस समय फ्रॉड के दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर रहा है और फंड की रिकवरी (recovery) के प्रयास जारी हैं। इस जांच के लिए KPMG जैसी प्रतिष्ठित फर्म को स्वतंत्र फोरेंसिक ऑडिट (forensic audit) करने का जिम्मा सौंपा गया है।
इस ₹583 करोड़ के भुगतान से बैंक पर एक बड़ा वित्तीय बोझ कम हुआ है, जिससे वह भविष्य के विकास पर और अधिक ध्यान केंद्रित कर सकता है। बैंक टेक्नोलॉजी और अपने वितरण नेटवर्क (distribution network) में लगातार निवेश कर रहा है, जिससे FY'27 से प्रॉफिट ग्रोथ (profit growth) की उम्मीद है।
हालांकि, ₹590 करोड़ के फ्रॉड से पूरी तरह फंड की रिकवरी की अनिश्चितता बनी हुई है। लंबी कानूनी प्रक्रियाओं के कारण रिकवरी में वक्त लग सकता है, जिसका असर बैंक की बैलेंस शीट पर पड़ सकता है। इस घटना से बैंक की प्रतिष्ठा (reputational impact) पर भी सवाल उठ सकते हैं, हालाँकि बैंक अपनी त्वरित कार्रवाई पर जोर दे रहा है। रेगुलेटर RBI भी स्थिति पर नजर रखे हुए है, लेकिन फिलहाल कोई बड़ा सिस्टमिक इशू (systemic issue) नहीं देख रहा।
निवेशकों को क्या देखना है
- फोरेंसिक ऑडिट के नतीजे: KPMG की रिपोर्ट से फ्रॉड की पूरी गहराई और बैंक के इंटरनल कंट्रोल (internal control) में खामियों का पता चलेगा।
- रिकवरी की प्रगति: बैंक फ्रॉड के पैसे को कितना वसूल पाता है, यह देखना अहम होगा।
- रेगुलेटरी एक्शन: RBI की ओर से किसी भी तरह की नई कार्रवाई पर नजर रहेगी।
- भविष्य का प्रदर्शन: कस्टमर बिज़नेस की ग्रोथ, NIM में बढ़ोतरी और एसेट क्वालिटी का बने रहना, यह बताएगा कि बैंक इस घटना से कितना उबर पाया है।
- हरियाणा सरकार से रिश्ते: सरकारी कामों के लिए बैंक की दोबारा एम्पेनलमेंट (re-empanelment) भी एक अहम मुद्दा रहेगा।