IDFC FIRST Bank: निवेशकों की बल्ले-बल्ले! Q3 में PAT **48%** उछला, बैंक ने मचाया धमाल

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
IDFC FIRST Bank: निवेशकों की बल्ले-बल्ले! Q3 में PAT **48%** उछला, बैंक ने मचाया धमाल
Overview

IDFC FIRST Bank के निवेशकों के लिए खुशखबरी! बैंक ने तीसरी तिमाही (Q3 FY26) में दमदार परफॉरमेंस दिखाते हुए अपने प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) में **48%** की ज़बरदस्त बढ़त दर्ज की है। यह **₹503 करोड़** रहा।

IDFC FIRST Bank ने हाल ही में अपने दिसंबर तिमाही (Q3 FY26) के नतीजे पेश किए हैं, और ये नतीजे बेहद दमदार रहे हैं। बैंक के प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) में पिछले साल की इसी तिमाही के मुकाबले 48.1% का ज़बरदस्त उछाल आया, जो कि ₹503 करोड़ तक पहुंच गया। पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा ₹339 करोड़ था। ये नतीजे बताते हैं कि बैंक सही दिशा में आगे बढ़ रहा है।

आय के मोर्चे पर भी बैंक ने शानदार प्रदर्शन किया है। बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) 12.0% बढ़कर ₹5,492 करोड़ हो गई। डिपॉज़िट्स (Deposits) में ज़बरदस्त ग्रोथ देखने को मिली, जो 22.9% बढ़कर ₹2.9 लाख करोड़ पर पहुंच गई। इसमें ग्राहकों के डिपॉज़िट्स 24.3% बढ़कर ₹2.83 लाख करोड़ रहे। CASA डिपॉज़िट्स में 33% की शानदार बढ़त के साथ ये ₹1.5 लाख करोड़ तक पहुंच गए, जिससे CASA रेश्यो 51.6% पर बना हुआ है। वहीं, बैंक के लोन बुक (Loan Book) में भी 21% का इजाफा हुआ और यह ₹2.8 लाख करोड़ के पार निकल गई। फी इनकम (Fee Income) भी 15.5% बढ़कर ₹2,029 करोड़ दर्ज की गई।

मुनाफे के साथ-साथ बैंक ने अपनी क्वालिटी में भी सुधार दिखाया है। नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) पिछले तिमाही के मुकाबले 17 बेसिस पॉइंट्स (bps) सुधर कर 5.76% (एवरेज AUM पर) हो गया है। बैंक का कॉस्ट ऑफ फंड्स (Cost of Funds) घटकर 6.11% रह गया है, जो सात साल पहले 7.8% था, और मैनेजमेंट का लक्ष्य इसे फाइनेंशियल ईयर 2026 के अंत तक 6% से नीचे लाने का है। एसेट क्वालिटी (Asset Quality) के मोर्चे पर भी अच्छी खबर है, ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (GNPAs) घटकर 1.69% पर आ गए, जो पिछली तिमाही में 1.86% थे। नेट NPAs 0.53% पर स्थिर हैं। इस तिमाही के लिए क्रेडिट कॉस्ट (Credit Cost) 2.05% रही, और पूरे फाइनेंशियल ईयर 2026 के लिए यह करीब 2.1% रहने का अनुमान है। ऑपरेटिंग एक्सपेंसेस (Opex) में पिछले साल के मुकाबले 13.4% की बढ़ोतरी हुई, हालांकि मैनेजमेंट ने बताया कि इसमें नए लेबर कोड के कारण ₹65 करोड़ का अतिरिक्त असर शामिल है, जिससे असली ग्रोथ 12.1% मानी जा सकती है।

बैंक ने अपनी कैपिटल पोजीशन (Capital Position) को भी काफी मजबूत किया है। ₹7,500 करोड़ के कम्पल्सरी कन्वर्टिबल प्रेफरेंस शेयर्स (CCPS) को शेयरों (Equity) में बदला गया है, जिससे बैंक का CET1 रेश्यो बढ़कर 14.23% और टोटल कैपिटल एडिक्वेसी रेश्यो (CAR) 16.22% हो गया है। बैंक ने अपने नेटवर्क का विस्तार करते हुए 25 नई ब्रांचेज़ खोली हैं, जिससे कुल ब्रांचेज़ की संख्या 1,066 हो गई है। मैनेजमेंट का भरोसा है कि बैंक जल्द ही 1.6% के आसपास का रिटर्न ऑन एसेट्स (ROA) हासिल कर लेगा।

हालांकि नतीजे मजबूत हैं, लेकिन कुछ बातों पर नज़र रखनी होगी। ऑपरेटिंग एक्सपेंसेस में हुई बढ़ोतरी, खासकर लेबर लॉज़ के कारण, पर लगातार नज़र रखनी होगी ताकि यह आय की ग्रोथ से पीछे न रह जाए। साथ ही, बढ़ते लोन बुक के साथ एसेट क्वालिटी को बनाए रखना भी एक अहम चुनौती होगी।

कुल मिलाकर, IDFC FIRST Bank अपने ट्रांसफॉर्म्ड लायबिलिटी फ्रेंचाइजी, नियंत्रित खर्चों और एसेट क्वालिटी पर फोकस के दम पर टिकाऊ प्रॉफिटेबिलिटी की ओर बढ़ता दिख रहा है। निवेशक 1.6% के ROA लक्ष्य और कॉस्ट ऑफ फंड्स में आगे की कमी पर नज़र रखेंगे। बैंक की शाखाओं का विस्तार और डिपॉज़िट्स व लोन्स में लगातार वृद्धि इसकी पॉजिटिव ग्रोथ को सपोर्ट करने की उम्मीद है।

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