IDFC FIRST Bank ने इस गंभीर मामले में पारदर्शिता लाने के लिए जानी-मानी ग्लोबल ऑडिट और एडवाइजरी फर्म KPMG को स्वतंत्र फॉरेंसिक ऑडिट (Forensic Audit) करने की जिम्मेदारी सौंपी है। यह नियुक्ति बैंक द्वारा 21 फरवरी, 2026 को चंडीगढ़ ब्रांच में हरियाणा सरकार के खातों से जुड़े लगभग ₹590 करोड़ के बड़े फ्रॉड का खुलासा करने के तुरंत बाद की गई है।
एक्शन में बैंक, 4 कर्मचारी सस्पेंड
इस फ्राडुलेंट एक्टिविटी (fraudulent activity) के जवाब में, बैंक ने तत्काल कार्रवाई करते हुए चार कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है और पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई है। 20-21 फरवरी, 2026 को बैंक के बोर्ड और ऑडिट कमेटी (Audit Committee) ने इन Developments की समीक्षा की। KPMG की नियुक्ति इस घटना की पूरी और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की बैंक की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
सेबी के नियमों का पालन
बैंक ने 22 फरवरी, 2026 को यह जानकारी देते हुए बताया कि KPMG की नियुक्ति SEBI लिस्टिंग रेगुलेशंस (SEBI Listing Regulations) के अनुपालन में की गई है, जो ऐसे मामलों में पारदर्शिता और नियामक नियमों के पालन की आवश्यकता पर जोर देते हैं।
फ्रॉड कैसे सामने आया?
21 फरवरी, 2026 को IDFC FIRST Bank ने बताया कि उसके चंडीगढ़ ब्रांच के कुछ कर्मचारियों द्वारा अनधिकृत और धोखाधड़ी वाली गतिविधियों का पता चला है। यह मामला तब सामने आया जब हरियाणा सरकार के एक विभाग ने अपने खातों को बंद करने और फंड ट्रांसफर करने का अनुरोध किया। इस पर बैंक को खातों में दर्ज बैलेंस (claimed balances) और वास्तविक शेष (actual account figures) के बीच भारी गड़बड़ी का पता चला। बाद में, 18 फरवरी, 2026 को अन्य सरकारी संस्थाओं से संपर्क करने पर यह संकेत मिला कि इस ब्रांच द्वारा मैनेज किए जा रहे कुछ खातों में समस्या और भी बड़ी हो सकती है।
आगे क्या उम्मीद करें?
- शेयरहोल्डर्स (Shareholders) को KPMG द्वारा स्वतंत्र थर्ड-पार्टी (Third-party) जांच के माध्यम से ₹590 करोड़ के फ्रॉड की विस्तृत रिपोर्ट मिलने की उम्मीद है।
- नियामक संस्थाएं (Regulators) बैंक के इंटरनल कंट्रोल्स (Internal Controls) और रिस्क मैनेजमेंट (Risk Management) पर अधिक बारीकी से नजर रखेंगी।
- बैंक के मैनेजमेंट पर सुरक्षा उपायों को मजबूत करने और जवाबदेही तय करने का दबाव बढ़ेगा।
- ऑडिट के नतीजे फ्रॉड के सटीक वित्तीय प्रभाव को स्पष्ट करेंगे और रिकवरी (recovery) के प्रयासों को दिशा देंगे।
जोखिम क्या हैं?
- रिकवरी के प्रयासों और दावों के सत्यापन पर फ्रॉड का अंतिम वित्तीय प्रभाव निर्भर करेगा।
- सेबी या अन्य प्राधिकरणों से संभावित नियामक कार्रवाई या जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है।
- बैंक की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंच सकता है, खासकर सरकारी संस्थाओं के साथ।
- फॉरेंसिक ऑडिट प्रक्रिया के दौरान और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।