शेयर में आई तूफानी गिरावट, ₹14,000 करोड़ से ज्यादा का नुकसान
इस फ्रॉड की खबर सामने आने के बाद IDFC First Bank के शेयरों में भारी गिरावट देखी गई। 23 फरवरी 2026 को स्टॉक 20% तक गिरकर ₹66.85 के स्तर पर आ गया। यह पिछले छह सालों में एक दिन में आई सबसे बड़ी गिरावट थी, जिसने बैंक के मार्केट कैपिटलाइजेशन को ₹14,000 करोड़ से ज्यादा घटा दिया। 24 फरवरी 2026 तक शेयर करीब ₹70 के आसपास कारोबार कर रहा था।
गवर्नेंस पर उठ रहे सवाल, वैल्यूएशन पर बढ़ी जांच
IDFC First Bank का प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेश्यो फिलहाल 38 से 45 के बीच है, जो सेक्टर के औसत 20 के मुकाबले काफी ज्यादा है। इस प्रीमियम वैल्यूएशन पर अब फ्रॉड की घटना के बाद ज्यादा गौर से देखा जा रहा है। HDFC Bank, ICICI Bank और Kotak Mahindra Bank जैसे बड़े बैंक अक्सर इससे कम वैल्यूएशन पर ट्रेड करते हैं। भारत में बैंकों में फ्रॉड के मामले बढ़ते रहे हैं, और कई बार इंटरनल मिलीभगत भी सामने आई है। इस घटना ने एक बार फिर फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस में फ्रॉड डिटेक्शन और प्रिवेंशन सिस्टम की कमजोरियों को उजागर किया है।
विश्लेषकों की राय बंटी, कमाई पर असर की आशंका
विश्लेषकों की राय बंटी हुई है। जहां Nomura ने गवर्नेंस और कंट्रोल को लेकर चिंता जताई है, वहीं कुछ अन्य ब्रोकरेज हाउस न्यूट्रल या 'Add' रेटिंग दे रहे हैं और ₹80-₹97 का टारगेट प्राइस बता रहे हैं। बैंक का 'Mojo Score' भी हाल ही में 'Hold' पर डाउनग्रेड हुआ है। इस फ्रॉड से बैंक की कमाई पर भी असर पड़ने की आशंका है। Nomura का अनुमान है कि प्रोविजनिंग और कानूनी खर्चों के कारण फाइनेंशियल ईयर 2026 और 2027 की कमाई पर 19 बेसिस पॉइंट का असर पड़ सकता है, जो बैंक के CET-1 कैपिटल रेशियो को प्रभावित करेगा।
बैंक का दावा, हम मजबूती से खड़े हैं
IDFC First Bank के CEO, V. Vaidyanathan ने निवेशकों को भरोसा दिलाया है कि बैंक फंडामेंटली मजबूत है, अच्छी तरह से कैपिटलाइज्ड है और प्रॉफिटेबिलिटी की राह पर है। मामले की पूरी सच्चाई जानने के लिए KPMG को इंडिपेंडेंट फोरेंसिक ऑडिट की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिसकी रिपोर्ट चार से पांच हफ्ते में आने की उम्मीद है। हालांकि, यह भी सामने आया है कि फ्रॉड का खुलासा होने से पहले ही, 18 फरवरी को हरियाणा सरकार ने बैंक को सरकारी खातों के लिए डी-एम्पैनल कर दिया था, जो बैंक के इंटरनल सिस्टम पर और सवाल खड़े करता है।