प्राइवेटाइजेशन की उम्मीदों पर शेयरों में धमाल!
प्राइवेटाइजेशन (Privatisation) की सुगबुगाहट के बीच IDBI Bank के शेयरों में गजब की ट्रेडिंग देखने को मिली। आज, 4 फरवरी 2026 को, IDBI Bank के शेयर 10% चढ़कर ₹112.28 पर पहुंच गए। इस दौरान ट्रेडिंग वॉल्यूम सामान्य से चार गुना बढ़कर 41.5 मिलियन शेयरों का था। यह हलचल तब हुई जब बेंचमार्क BSE Sensex में मामूली 0.04% की गिरावट दर्ज की गई। शेयर अपने 52-हफ़्ते के हाई ₹118.45 के करीब पहुंच रहा है, जो उसने 5 जनवरी 2026 को छुआ था।
disinvestment प्रक्रिया में तेज़ी: खरीदार कौन?
इस जोरदार तेजी का मुख्य कारण disinvestment प्रक्रिया का अंतिम चरण है। DIPAM द्वारा प्रबंधित इस बिक्री के लिए फाइनेंशियल बिड (Financial Bid) जमा करने की अंतिम तिथि 5 फरवरी 2026 है। सरकार और LIC मिलकर अपनी 60.7% हिस्सेदारी बेच रहे हैं, जिसमें सरकार 30.48% और LIC 30.24% स्टेक बेच रही है। सफल बिडर की घोषणा मार्च 2026 के अंत तक होने की उम्मीद है।
प्रदर्शन सुधरा, पर वैल्यूएशन पर सवाल
IDBI Bank ने अपने प्रदर्शन में कई महत्वपूर्ण सुधार दिखाए हैं। 2025 के अंत तक, बैंक का कुल बिजनेस (Total Business) 12% साल-दर-साल बढ़कर ₹5.46 लाख करोड़ हो गया। बैंक की एसेट क्वालिटी (Asset Quality) भी मजबूत हुई है, जहां सितंबर 2025 तक ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (GNPA) घटकर 2.2% पर आ गए, जो कई दशकों का निचला स्तर है। बैंक ने क्रेडिट कॉस्ट (Credit Cost) को भी बखूबी संभाला है और पुराने स्ट्रेस्ड एसेट्स से अच्छी रिकवरी भी हुई है। ICRA जैसी रेटिंग एजेंसियों ने बैंक के कैपिटलाइजेशन प्रोफाइल (Capitalisation Profile) और लॉस-एब्जॉर्प्शन कैपेबिलिटी (Loss-absorption Capability) पर सकारात्मक राय दी है।
हालांकि, बैंक का वैल्यूएशन (Valuation) कुछ चिंता का विषय बना हुआ है। फरवरी 2026 की शुरुआत में, इसका प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेशियो लगभग 11.3x से 13.1x के बीच था (जनवरी 2026 में एक रिपोर्ट 11.80x और दूसरी 13.1x बताती है)। यह व्यापक बैंकिंग इंडस्ट्री एवरेज 14.21x से कम है, लेकिन कई पब्लिक सेक्टर बैंकों की तुलना में यह प्रीमियम है। उदाहरण के लिए, SBI का P/E रेशियो 10-11x है, जबकि बैंक ऑफ बड़ौदा और पंजाब नेशनल बैंक जैसे बैंक 6-7x के मल्टीपल पर ट्रेड कर रहे हैं। IDBI का P/B रेशियो करीब 1.86x है। जनवरी 2026 के अंत में बैंक का मार्केट कैप (Market Cap) लगभग ₹1.05 ट्रिलियन था, वहीं 2 फरवरी 2026 को यह ₹109,976 Cr था।
सेक्टर की चाल और सरकारी लक्ष्य
भारतीय बैंकिंग सेक्टर में मजबूत ग्रोथ देखने को मिल रही है, जहां दिसंबर 2025 तक क्रेडिट 14.5% साल-दर-साल बढ़ा था। 2026 के लिए आउटलुक (Outlook) क्रेडिट ग्रोथ में सुधार और मार्जिन प्रेशर (Margin Pressure) में कमी का संकेत देता है, हालांकि लिक्विडिटी (Liquidity) एक चुनौती बन सकती है। यूनियन बजट 2026-27 में ₹80,000 करोड़ का महत्वाकांक्षी disinvestment टारगेट रखा गया है, जो IDBI Bank और LIC जैसे बड़े ट्रांजैक्शन पर काफी निर्भर करता है।
हाल ही में, Nifty PSU Bank इंडेक्स में 8% की गिरावट देखी गई, क्योंकि मजबूत रैली के बाद प्रॉफिट-बुकिंग (Profit-booking) हुई। बैंकिंग सेक्टर में कंसॉलिडेशन (Consolidation) और स्वामित्व संरचनाओं की समीक्षा की चर्चाओं ने भी इस सेंटिमेंट को बल दिया है। ऐतिहासिक रूप से, IDBI Bank के शेयर ने disinvestment की खबरों पर वोलेटिलिटी (Volatility) दिखाई है, जैसे जनवरी 2025 में कर्मचारियों के विरोध के कारण 9% की गिरावट आई थी।
एनालिस्ट्स की राय और आगे की राह
हाल के मजबूत ऑपरेशनल परफॉरमेंस के बावजूद, एनालिस्ट्स (Analysts) की राय मिली-जुली है। टेक्निकल इंडिकेटर्स (Technical Indicators) 'स्ट्रॉन्ग बाय' (Strong Buy) का संकेत दे रहे हैं, जिसमें RSI 62.86 है। हालांकि, कुछ विश्लेषणों के अनुसार स्टॉक 'टेक्निकली न्यूट्रल' है। MarketsMojo जैसे प्लेटफॉर्म से 'होल्ड' रेटिंग (Hold Rating) और हालिया डाउनग्रेड (Downgrade) आगे की सावधानी बरतने की सलाह देते हैं, जो डिलीवरी वॉल्यूम (Delivery Volume) और सेक्टर डेवलपमेंट पर नजर रखने को कहते हैं। सरकार की PSU बैंक स्टेक डाइल्यूशन (PSU Bank Stake Dilution) की प्रतिबद्धता और व्यापक disinvestment एजेंडा स्ट्रैटेजिक सेल्स (Strategic Sales) पर निरंतर फोकस को दर्शाता है। IDBI Bank की बिक्री का सफल होना भारत की बैंकिंग रिफॉर्म और disinvestment स्ट्रेटेजी के लिए एक महत्वपूर्ण परीक्षा साबित होगी।
