सरकार IDBI Bank में अपनी **60.72%** हिस्सेदारी Fairfax Financial Holdings को बेचने की तैयारी में है, लेकिन यह डील अब राजनीतिक विवादों में घिर गई है। **₹52,878 करोड़** की इस प्रस्तावित डील के लिए अभी RBI और CCI की मंजूरी का रास्ता साफ होना बाकी है।
बड़ी डील और सरकारी योजना
सरकार और LIC मिलकर IDBI Bank में 60.72 फीसदी हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया में हैं। इस बड़ी हिस्सेदारी को प्रेम वत्सा की कंपनी Fairfax Financial Holdings की सब्सिडियरी, '10955230 Canada Inc' को बेचा जाना है। ₹52,878 करोड़ के इस बड़े सौदे को भारत के फाइनेंशियल सेक्टर में प्राइवेटाइजेशन की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
राजनीतिक खींचतान और बैंकिंग रिफॉर्म
हाल ही में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव के बीच हुई बयानबाजी ने इस मुद्दे को सुर्खियों में ला दिया है। यह बहस 2014 के बाद लागू किए गए बैंकिंग सुधारों, डिजिटल बैंकिंग चार्जेस, पेनल्टी स्ट्रक्चर और जन धन योजना जैसे मुद्दों के इर्द-गिर्द घूम रही है। निवेशकों के लिए फिलहाल राजनीतिक शोर से ज्यादा महत्वपूर्ण रेगुलेटरी प्रोसेस है।
रेगुलेटरी अड़चनें और आगे का रास्ता
इतने बड़े पैमाने पर बैंक का ओनरशिप ट्रांसफर आसान नहीं है। इसके लिए दो बड़े मोर्चों पर मंजूरी अनिवार्य है:
- Reserve Bank of India (RBI): बैंक का नया मालिक 'फिट एंड प्रॉपर' (fit and proper) क्राइटेरिया पर खरा उतरता है या नहीं, इसकी गहन जांच होगी।
- Competition Commission of India (CCI): यह सुनिश्चित करेगा कि इस डील से बाजार में प्रतिस्पर्धा (market competition) पर कोई प्रतिकूल असर न पड़े।
एक समय Prompt Corrective Action फ्रेमवर्क में रहने के बाद मुनाफा कमाने वाले IDBI Bank के लिए यह बदलाव मैनेजमेंट और ऑपरेशनल एफिशिएंसी के लिहाज से अहम साबित हो सकता है। फिलहाल, सभी की नजरें RBI और CCI की अगली आधिकारिक प्रतिक्रिया पर टिकी हैं, जो इस डील की टाइमलाइन तय करेगी।
