IDBI Bank में LIC की हिस्सेदारी की बिक्री को लेकर ऑल-इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन (AIBOA) ने IRDAI से हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है। एसोसिएशन ने कंपनी के वैल्यूएशन पर सवाल उठाए हैं। सरकार इस **$5.7 बिलियन** के ट्रांजेक्शन के लिए फाइनल बिड्स का मूल्यांकन कर रही है, और निवेशक रेगुलेटरी क्लीयरेंस और फाइनल बिड के चुनाव पर नजरें टिकाए हुए हैं।
क्या है AIBOA की चिंता?
ऑल-इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन (AIBOA) ने भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) को IDBI Bank के रणनीतिक विनिवेश (strategic disinvestment) की समीक्षा के लिए एक औपचारिक याचिका दायर की है। एसोसिएशन की मुख्य चिंता लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (LIC) द्वारा IDBI Bank में रखी गई हिस्सेदारी के वैल्यूएशन को लेकर है। उनका तर्क है कि प्रस्तावित बिक्री मूल्य, पॉलिसीधारकों के हितों की रक्षा के लिए, लंबी अवधि के निवेश की उम्मीदों के अनुरूप होना चाहिए।
LIC के लिए क्या है मायने?
LIC ने 2018 में 51% हिस्सेदारी लगभग ₹61 प्रति शेयर के भाव पर खरीदी थी। हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बिक्री का संभावित मूल्य लगभग ₹82 प्रति शेयर बताया जा रहा है। AIBOA का मानना है कि यह वैल्यूएशन, लगभग आठ साल की होल्डिंग अवधि में उत्पन्न हुए मूल्य को पूरी तरह से नहीं दर्शाता है। एसोसिएशन को डर है कि अपर्याप्त मूल्य पर बिक्री, LIC के समग्र निवेश पोर्टफोलियो पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है, जिसका असर पॉलिसीधारकों के भविष्य के बोनस पर पड़ सकता है।
सौदे की वर्तमान स्थिति
विनिवेश प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में है। भारत सरकार और LIC, फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स (Fairfax Financial Holdings) और एमिरेट्स एनबीडी (Emirates NBD) सहित अंतरराष्ट्रीय बोलीदाताओं से प्राप्त संशोधित वित्तीय बोलियों का मूल्यांकन कर रहे हैं। 60.7% हिस्सेदारी की इस संयुक्त बिक्री का मूल्य लगभग $5.7 बिलियन है। 24 अगस्त 2026 तक, IDBI Bank के शेयर लगभग ₹83 पर कारोबार कर रहे थे, जो आने वाले सौदे पर निवेशकों के फोकस को दर्शाता है।
रेगुलेटरी चुनौतियां
हालांकि सरकार अगले महीने तक विनिवेश प्रक्रिया को अंतिम रूप देने का लक्ष्य रखती है, यह ट्रांजेक्शन जटिल नियामक जांच के अधीन है। फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स जैसे संभावित अधिग्रहणकर्ताओं को RBI के नियमों का पालन करना पड़ सकता है, खासकर अन्य वित्तीय संस्थानों जैसे CSB Bank में उनकी मौजूदा हिस्सेदारी को लेकर। इसके लिए विलय या विनिवेश की आवश्यकता हो सकती है। ये नियामक आवश्यकताएं, सार्वजनिक क्षेत्र के प्रबंधन से निजी स्वामित्व में संक्रमण के साथ मिलकर, सौदे के निष्पादन के लिए महत्वपूर्ण कारक बनी हुई हैं।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
AIBOA का यह हस्तक्षेप बड़े पैमाने पर विनिवेश से जुड़ी संवेदनशीलताओं को उजागर करता है, खासकर वैल्यूएशन में पारदर्शिता और सार्वजनिक क्षेत्र के हितों की सुरक्षा के संबंध में। आने वाले सप्ताह महत्वपूर्ण होंगे क्योंकि सरकार सफल बोलीदाता का चयन करने और आवश्यक नियामक मंजूरी हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ेगी। बाजार प्रतिभागी अंतिम प्रस्ताव मूल्य, चुने गए खरीदार और RBI और IRDAI जैसे नियामकों द्वारा निर्धारित किसी भी शर्त पर नजर रखेंगे ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि संक्रमण योजना के अनुसार आगे बढ़े।
