IDBI Bank Share Price: ₹72,000 करोड़ की डील पर सरकार का बड़ा दांव! कम बोलियों के बावजूद विनिवेश जारी

BANKINGFINANCE
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AuthorMehul Desai|Published at:
IDBI Bank Share Price: ₹72,000 करोड़ की डील पर सरकार का बड़ा दांव! कम बोलियों के बावजूद विनिवेश जारी
Overview

IDBI Bank के विनिवेश (stake sale) को लेकर सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने साफ कर दिया है कि बैंक में हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया जारी रहेगी, भले ही मौजूदा बोलियां उम्मीद से कम हों और मूल्यांकन (valuation) को लेकर कुछ सवाल हों।

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सरकारी लक्ष्यों को प्राथमिकता

सरकारी बैंकों के मर्जर (merger) की बड़ी योजनाओं को फिलहाल टालते हुए, सरकार IDBI Bank में अपनी हिस्सेदारी बेचने पर आगे बढ़ रही है। यह फैसला सरकारी खजाने को भरने और राजकोषीय लक्ष्यों (fiscal targets) को हासिल करने की रणनीति का हिस्सा है। एक तरफ जहां बैंक कंसॉलिडेशन (consolidation) पर एक विशेष कमेटी विचार करेगी, वहीं दूसरी ओर IDBI Bank की बिक्री प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जा रही है।

कम बोलियों के बीच डील जारी

IDBI Bank के प्राइवेटाइजेशन (privatization) की प्रक्रिया फरवरी 2023 में शुरू हुई थी। हालांकि, रिपोर्ट्स के मुताबिक, मिली हुई बोलियां सरकार की उम्मीदों से काफी कम हैं। यह बोलियां करीब ₹40,000 करोड़ से ₹45,000 करोड़ के बीच बताई जा रही हैं, जबकि सरकार का लक्ष्य ₹72,000 करोड़ के करीब था। इसके बावजूद, सरकारी अधिकारी इस डील को आगे बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं।

मूल्यांकन में अंतर और पीयर कंपैरिजन

सरकार और बिडर्स के बीच मूल्यांकन (valuation) को लेकर एक बड़ा अंतर साफ दिख रहा है। IDBI Bank के शेयर फिलहाल लगभग ₹105 के स्तर पर ट्रेड कर रहे हैं, जिससे इसकी मार्केट कैप करीब ₹1.2 ट्रिलियन बनती है। इसका P/E रेशियो लगभग 15x है। वहीं, HDFC Bank और ICICI Bank जैसे बड़े बैंक 22x और 19x के P/E पर ट्रेड कर रहे हैं, जो उनकी मजबूत पकड़ और कमाई को दर्शाता है। State Bank of India का P/E लगभग 12x है। IDBI Bank का RSI 55 के आसपास है, जो न्यूट्रल मोमेंटम का संकेत दे रहा है।

सौदे में छिपे जोखिम

इस डील को ऐसे समय में आगे बढ़ाने में कुछ जोखिम भी हैं। अगर सरकार बहुत कम कीमत पर हिस्सेदारी बेचती है, तो यह भविष्य की सरकारी संपत्तियों की बिक्री के लिए एक गलत मिसाल कायम कर सकती है। अगर Life Insurance Corporation of India (LIC) इसमें बड़ी भूमिका निभाती है, तो इसे असली प्राइवेटाइजेशन की बजाय एक आंतरिक पुनर्गठन के तौर पर देखा जा सकता है। IDBI Bank अपनी कम विविध आय (diversified income) और बाजार स्थिति के कारण आर्थिक मंदी और प्रतिस्पर्धा के प्रति अधिक संवेदनशील है।

आगे की राह: पुनर्मूल्यांकन और वार्ता

आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि अधिकारी मूल्यांकन के तरीकों पर फिर से विचार कर रहे हैं और हाल की अस्थिरता से पहले के बैंक के बाजार मूल्य को डील गाइड करने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। सरकार इस सौदे को पूरा करने के लिए दृढ़ दिख रही है, लेकिन अंतिम शर्तें और कीमत अभी भी बातचीत के दौर में हैं।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.