डिवेस्टमेंट में आई रुकावट से बढ़ी अनिश्चितता
IDBI Bank की हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया रुकने से मार्केट में काफी अनिश्चितता आ गई है, भले ही बैंक के ऑपरेशन सुधर रहे हों। IDBI Bank ने दिसंबर 2025 को समाप्त तीसरी तिमाही में ₹1,935 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है। बैंक का ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (NPA) अनुपात भी घटकर 2.57% पर आ गया है। हालांकि, मार्केट ने इन सकारात्मक नतीजों को नजरअंदाज कर दिया और शेयर में गिरावट देखी गई।
बोलियां रिजर्व प्राइस से काफी नीचे
सरकार और LIC की संयुक्त 60.72% हिस्सेदारी बेचने की स्ट्रैटेजिक सेल (strategic sale) को फिलहाल रोक दिया गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, फरवरी 2026 में प्राप्त वित्तीय बोलियां (financial bids) सरकार के तय रिजर्व प्राइस से काफी कम रह गईं। इस खबर का सीधा असर IDBI Bank के शेयर पर पड़ा, जिसमें 16.58% की भारी गिरावट दर्ज की गई। और तो और, मार्च 2026 को समाप्त सप्ताह में शेयर में 29% की बड़ी गिरावट आई। शेयर अब अपने 52-हफ्ते के निचले स्तर ₹65.00 के करीब ट्रेड कर रहे हैं, जो लंबे समय तक अनिश्चितता और बोली प्रक्रिया को फिर से शुरू करने की जरूरत को दर्शाता है।
वैल्यूएशन पर सवाल
ऑपरेशनल सुधारों के बावजूद, डिवेस्टमेंट में आ रही दिक्कतें IDBI Bank के वैल्यूएशन को प्रभावित कर रही हैं। बैंक का प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेश्यो, लगभग 7.77 से 9.50 के बीच है, जो इसे पंजाब नेशनल बैंक (P/E ~6.90) और बैंक ऑफ बड़ौदा (P/E ~7.32) जैसे साथियों के बराबर रखता है, और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (P/E ~11.55) से कम है। हालांकि, हिस्सेदारी बेचने में लगातार आ रही दिक्कतें यह बताती हैं कि मार्केट इसके पूरे पोटेंशियल को अभी वैल्यू नहीं दे पा रहा है। यह स्थिति सार्वजनिक शेयर (public float) की कमी से और गंभीर हो जाती है, जो कि मात्र 5.29% है।
मार्जिन पर दबाव और टेक्निकल कमजोरी
डिवेलपमेंट प्रक्रिया रुकने के अलावा, IDBI Bank के नेट इंटरेस्ट मार्जिन (net interest margin) में गिरावट देखी गई है, जो Q3 FY26 में घटकर 3.52% हो गया। यह ट्रेंड HDFC Bank और Bank of India जैसे कुछ साथियों द्वारा देखी गई मार्जिन ग्रोथ के विपरीत है। ग्रॉस एनपीए (Gross NPA) घटकर 2.57% हुआ है, लेकिन गिरता हुआ नेट इंटरेस्ट मार्जिन प्रॉफिट और रिटर्न पर दबाव डाल रहा है। टेक्निकल चार्ट्स पर, शेयर एक मजबूत गिरावट का ट्रेंड दिखा रहा है, जहां 14-दिन का रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) 35.19 पर है, जो ओवरसोल्ड (oversold) स्थिति और निवेशकों की सतर्कता का संकेत दे रहा है।
सरकार की नई रणनीति
इस बड़ी डील के नाकाम होने के बाद, सरकार अब छोटे ऑफर-फॉर-सेल (OFS) ट्रान्शेस की ओर बढ़ सकती है। इस रणनीति का लक्ष्य धीरे-धीरे बैंक के पब्लिक फ्लोट को बढ़ाना और एक विश्वसनीय मार्केट प्राइस स्थापित करना है। हालांकि, इस रणनीति से पूरी हिस्सेदारी बेचने की समय-सीमा लंबी हो सकती है। IDBI Bank के शेयर का भविष्य अभी भी अनिश्चित बना हुआ है, खासकर स्वामित्व संरचना के अनसुलझे होने और गिरते नेट इंटरेस्ट मार्जिन से जुड़े ऑपरेशनल दबावों के कारण।