IDBI Bank की हिस्सेदारी बिक्री की प्रक्रिया में एक अहम मोड़ आ गया है। सरकार और LIC, जो बैंक में 94.71% हिस्सेदारी रखते हैं, ने नई बोलियां मांगने से पहले एक ताज़ा वैल्यूएशन (valuation) एक्सरसाइज शुरू करने का फैसला किया है। इस कदम से नई बोलियां आमंत्रित करने में करीब एक महीने की देरी होने की उम्मीद है।
क्यों हो रही है देरी?
यह रणनीतिक बदलाव तब आया है जब पिछली कोशिशों में संभावित खरीदारों, जैसे कि फेयरफैक्स इंडिया होल्डिंग्स (Fairfax India Holdings) और एमिरेट्स एनबीडी (Emirates NBD) से मिली बोलियां सरकार की अपेक्षित कीमत से काफी नीचे रह गईं। मार्केट की मौजूदा चालबाज़ी और ग्लोबल इकोनॉमी के अनिश्चित माहौल को देखते हुए, सरकार और LIC अब किसी भी तरह के पब्लिक सिग्नलिंग या स्टॉक में बड़ी तेज़ी से बचने की रणनीति अपना रहे हैं। वे अधिक सतर्क और निजी दृष्टिकोण की ओर बढ़ रहे हैं।
शेयर की कीमत और वैल्यूएशन गैप
IDBI Bank के शेयर की कीमत भी अपने उच्चतम स्तर ₹118 से गिरकर ₹70 के निचले स्तर पर आ गई है, जिसने किसी भी बिक्री के लिए मौजूदा बाजार मूल्य को एक बड़ी बाधा बना दिया है। इस कीमत में गिरावट के साथ-साथ, बोलियों का रिजर्व प्राइस से कम रहना, मार्च 2026 में हिस्सेदारी बिक्री प्रक्रिया के रद्द होने का मुख्य कारण बना। बोलियों में एक बड़ा वैल्यूएशन गैप था, जिसमें ₹40,000 करोड़ से ₹45,000 करोड़ तक की बोलियां आईं, जबकि सरकार का अनुमान ₹66,000 करोड़ से ₹72,000 करोड़ के बीच था। फिलहाल बैंक का मार्केट कैपिटलाइज़ेशन लगभग ₹77,000 करोड़ से ₹79,000 करोड़ है, और इसका P/E रेशियो लगभग 8 से 8.6 के बीच है। बैंक का पब्लिक फ्लोट (public float) भी केवल 5.29% है, जो शेयर की कीमत में उतार-चढ़ाव का एक कारण बनता है।
बैंकिंग सेक्टर का परिदृश्य
भारतीय बैंकिंग सेक्टर में लगातार बदलाव देखने को मिल रहा है। उदाहरण के लिए, इंडियन बैंक (Indian Bank) का P/E रेशियो 10.59 है, जो IDBI बैंक से ज़्यादा है। विलय और अधिग्रहण (Mergers and Acquisitions) आम बात है, जैसे SBI ने कंसॉलिडेशन किया है। बैंक अपनी लाभप्रदता (profitability) बढ़ाने के लिए रिटेल बिज़नेस और CASA डिपॉजिट पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। IDBI Bank का कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो (CAR) लगभग 25.05% और नेट एनपीए (Net NPA) अनुपात 0.15% से 0.18% के बीच है, जो अच्छी एसेट क्वालिटी (asset quality) दर्शाता है। हालांकि, 2026 की शुरुआत में वैश्विक मुद्दों के कारण क्रॉस-बॉर्डर फंडिंग में कमी आने से सौदों के मूल्य में तेज गिरावट आई थी।
निवेशक भावना और जोखिम
मार्च 2026 में रिजर्व प्राइस से कम बोलियां आने के कारण बिक्री प्रक्रिया रद्द होने से निवेशकों का विश्वास डगमगाया और शेयर में गिरावट आई। प्राइवेटाइजेशन (privatization) की उम्मीदों ने शेयर को ₹72 से ₹118 तक बढ़ाया था, और अब नई वैल्यूएशन का आकलन करना पड़ रहा है। एक बड़ा जोखिम बैंक की ₹3,35,786 करोड़ की आकस्मिक देनदारियां (contingent liabilities) हैं। हाल के मुनाफे में वृद्धि और ROE 13.67% के आसपास मजबूत है, लेकिन पिछले तीन सालों का ROE 11.4% और कम इंटरेस्ट कवरेज रेशियो (interest coverage ratio) चिंता का विषय हैं। PSU (पब्लिक सेक्टर यूनिट) स्टेक सेल (stake sale) में अक्सर राजनीतिक अड़चनें, नौकरशाही देरी और वैल्यूएशन पर असहमति जैसे मुद्दे सामने आते हैं, जिससे बार-बार टालमटोल होती है। बाज़ार ने नए मालिक के आने के फायदों को पहले ही भुना लिया था, और अब इस संभावना के न होने से शेयर की कीमत पर दबाव पड़ रहा है।
भविष्य की राह
वर्तमान स्टेक सेल (stake sale) प्रक्रिया रुकी हुई है, इसलिए IDBI Bank के लिए भविष्य की समय-सीमा अभी अनिश्चित है। कुछ अधिकारियों को उम्मीद है कि यह बिक्री फाइनेंशियल ईयर 2027 तक पूरी नहीं हो पाएगी। हालांकि कुछ एनालिस्ट IDBI Bank को उसके P/E रेशियो के कारण 'वैल्यू स्टॉक' मानते हैं, लेकिन राय बंटी हुई है। कुछ ₹125-₹130 तक के टारगेट की भविष्यवाणी कर रहे हैं, जबकि अन्य ने कम लक्ष्य रखे हैं। लिमिटेड ऐतिहासिक डेटा और पूर्वानुमान भविष्य की कमाई के अनुमानों को अविश्वसनीय बनाते हैं। सरकार विनिवेश (disinvestment) के लिए प्रतिबद्ध है और फाइनेंशियल ईयर 27 के लिए ₹80,000 करोड़ जुटाने का लक्ष्य रखती है, लेकिन सफलता बाजार की स्थितियों और परिष्कृत बिक्री रणनीतियों पर निर्भर करेगी।