सरकार ने स्पष्ट किया है कि IDBI Bank की हिस्सेदारी बेचने की डील में कर्मचारियों की सर्विस कंडीशंस और पेंशन सुरक्षित रहेगी। हालांकि, सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद यूनियन नवंबर में बड़े आंदोलन की तैयारी कर रही है। यह सौदा करीब **₹52,878 करोड़** का है।
क्या है सरकार का रुख?
डिपार्टमेंट ऑफ इन्वेस्टमेंट एंड पब्लिक एसेट मैनेजमेंट (DIPAM) ने कर्मचारियों की चिंताओं को देखते हुए यह साफ कर दिया है कि Fairfax Financial Holdings के साथ हुई डील में मौजूदा स्टाफ की सर्विस शर्तें और पेंशन पूरी तरह सुरक्षित रहेंगी। DIPAM सचिव अरुणिश चावला ने बताया कि 'शेयर परचेज एग्रीमेंट' (SPA) में इसके लिए स्पष्ट कानूनी सुरक्षा दी गई है, ताकि बैंक का कामकाज बिना किसी रुकावट के चलता रहे।
क्यों है यह डील इतनी बड़ी?
यह विनिवेश (Divestment) बैंक की कुल इक्विटी के 60% से अधिक हिस्से के ट्रांसफर से जुड़ा है, जिसकी वैल्यू लगभग ₹52,878 करोड़ आंकी गई है। सरकार का कहना है कि IDBI Bank पहले से ही 'कंपनीज एक्ट' और RBI के नियमों के तहत प्राइवेट सेक्टर लेंडर की श्रेणी में आता है, इसलिए इसकी कार्यप्रणाली सरकारी बैंकों से अलग है। यह स्पष्टता निवेशकों के लिए जरूरी है क्योंकि इससे निजीकरण की प्रक्रिया को कानूनी रूप से समझने में आसानी होती है।
यूनियन की चेतावनी और निवेशकों के लिए रिस्क
सरकार के इन दावों के बावजूद 'यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस' (UFBU) निजीकरण के विरोध में डटा हुआ है। नवंबर में प्रस्तावित देशव्यापी हड़ताल को लेकर माहौल गर्म है। हालांकि सरकार का मानना है कि इससे बैंक के ऑपरेशंस पर असर नहीं पड़ेगा, लेकिन बड़ी डील के दौरान ऐसी हड़तालें रेगुलेटरी अप्रूवल और इंटीग्रेशन फेज में थोड़ी मुश्किलें खड़ी कर सकती हैं। अब नजरें रेगुलेटरी मंजूरी और डील की फाइनल डेडलाइन पर टिकी हैं।
