IDBI Bank के स्टाफ यूनियन्स ने Parliamentary Standing Committee से बैंक के विनिवेश (Disinvestment) पर वाइट पेपर जारी करने की मांग की है। 60.72% हिस्सेदारी की बिक्री के अंतिम चरण में यह नई हलचल निवेशकों के लिए चिंता का विषय बन सकती है, जिसने हाल ही में स्टॉक में **14.5%** की तेजी दिखाई थी।
यूनियन की आपत्ति और मांग
United Forum of Officers ने सरकार से निजीकरण (Privatization) की पूरी योजना का ब्यौरा मांगा है। यूनियन का तर्क है कि सरकारी स्वामित्व से निजी हाथों में जाने से पहले वैल्यूएशन और एसेट्स के भविष्य पर संसद में चर्चा होनी चाहिए। यह मांग ऐसे समय पर उठी है जब बिक्री की प्रक्रिया अंतिम दौर में है।
विनिवेश की मौजूदा स्थिति
भारत सरकार और Life Insurance Corporation of India (LIC) मिलकर बैंक में 60.72% हिस्सेदारी बेचने की तैयारी में हैं। फिलहाल, Fairfax Financial Holdings इस रेस में सबसे आगे है। रिपोर्ट्स के अनुसार, संभावित खरीदार को CSB Bank में अपनी 40% हिस्सेदारी के चलते नियमों के तहत 2 साल की मोहलत देने पर विचार किया जा रहा है ताकि बैंकिंग नॉर्म्स का पालन हो सके।
शेयर बाजार पर असर
अगस्त 2026 के आखिरी हफ्ते में IDBI Bank के शेयरों में 14.5% की तूफानी तेजी देखी गई थी। इस अचानक उछाल पर स्टॉक एक्सचेंज के सवालों के जवाब में बैंक ने साफ किया था कि उनके पास कोई भी गोपनीय जानकारी (Price-sensitive information) नहीं है और यह तेजी बाजार के कारकों की वजह से थी।
यूनियन की यह मांग विनिवेश की टाइमलाइन में देरी का रिस्क पैदा करती है। अगर मामले की प्रशासनिक या कानूनी समीक्षा शुरू होती है, तो यह बैंक की वैल्युएशन और मार्केट सेंटिमेंट को प्रभावित कर सकता है। अब निवेशकों की नजर सरकार के आधिकारिक बयान और Reserve Bank of India (RBI) के अंतिम फैसलों पर टिकी है।
