दमदार वित्तीय प्रदर्शन: Q4 के नतीजे
IDBI Bank ने मार्च में समाप्त हुई तिमाही के लिए अपने नतीजे पेश किए हैं। बैंक के नेट एडवांसेज (Net Advances) में सालाना आधार पर 16% की जोरदार बढ़ोतरी हुई है, जो बढ़कर ₹2.53 लाख करोड़ हो गए हैं। यह मजबूत क्रेडिट मांग और प्रतिस्पर्धी ऋण बाजार में बैंक की प्रभावशीलता को दर्शाता है। वहीं, बैंक का टोटल बिज़नेस (Total Business) 14% की बढ़त के साथ ₹6 लाख करोड़ के आंकड़े को पार कर गया।
डिपॉज़िट्स में बढ़ोतरी, पर CASA की रफ्तार धीमी
बैंक के कुल डिपॉज़िट्स (Deposits) में 12% की बढ़ोतरी देखी गई और यह ₹3.5 लाख करोड़ तक पहुंच गए। हालांकि, बैंक के लिए कम लागत वाले CASA डिपॉज़िट्स (Current Account and Savings Account deposits) में धीमी 7% की बढ़त दर्ज की गई, जो ₹1.54 लाख करोड़ रहे। CASA डिपॉज़िट्स में धीमी बढ़ोतरी से बैंक की फंडिंग कॉस्ट (Funding Cost) थोड़ी बढ़ सकती है, हालांकि टर्म डिपॉज़िट्स (Term Deposits) कुल देनदारी विस्तार में योगदान देना जारी रखे हुए हैं।
सरकारी विनिवेश योजना पर लगा ब्रेक
दूसरी ओर, IDBI Bank में सरकार और लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (LIC) की बहुलांश हिस्सेदारी बेचने की योजना (Divestment Plan) एक बड़ी चुनौती का सामना कर रही है। उम्मीद के मुताबिक खरीदार नहीं मिले, और पेश किए गए बिड्स (Bids) तय रिज़र्व प्राइस (Reserve Price) से कम रहे। इस वजह से बैंक का पब्लिक फ्लोट (Public Float) फिलहाल केवल 5.29% पर है।
भविष्य की रणनीति: ऑफर-फॉर-सेल (OFS) का विचार
सूत्रों की मानें तो सरकार अब इस हिस्सेदारी को बेचने के लिए ऑफर-फॉर-सेल (Offer-for-Sale - OFS) जैसी रणनीति पर विचार कर सकती है। इस कदम का मकसद पब्लिक शेयरहोल्डिंग को धीरे-धीरे बढ़ाना, मार्केट लिक्विडिटी (Market Liquidity) को बेहतर करना और भविष्य में होने वाली स्ट्रेटेजिक सेल (Strategic Sale) के लिए बेहतर प्राइस डिस्कवरी (Price Discovery) करना है। सरकार के पास बैंक की 45.48% और LIC के पास 49.24% हिस्सेदारी है, जिसके चलते सही वैल्यूएशन के लिए फ्री फ्लोट बढ़ाना महत्वपूर्ण है।