खरीदारों को आकर्षित करने की नई रणनीति
सरकारी अधिकारी IDBI Bank में अपनी मेजॉरिटी हिस्सेदारी की बिक्री में खरीदारों की दिलचस्पी फिर से जगाने के रास्तों पर विचार कर रहे हैं। इस पर चर्चा का एक अहम विकल्प रिजर्व प्राइस को 20% तक कम करना है। यह कदम संभावित खरीदारों की उस हिचकिचाहट को दूर करने के लिए उठाया जा रहा है, जो पिछले बिडिंग राउंड में देखी गई थी, जो मार्च में रोक दिया गया था।
वर्षों की चुनौती और विनिवेश का एजेंडा
सरकार की कोशिश है कि बैंक के आंतरिक मूल्य (intrinsic value) को ध्यान में रखते हुए एक डील स्ट्रक्चर की जाए, न कि सिर्फ उसके घटते-बढ़ते शेयर प्राइस पर निर्भर रहा जाए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार को मुंबई स्थित इस बैंक के विनिवेश (divestment) में कई सालों से लगातार चुनौतियां मिल रही हैं। यह रुका हुआ प्रोसेस सरकारी कंपनियों के विनिवेश के व्यापक एजेंडे के लिए एक झटका साबित हो सकता है।
पिछली बोली और बाजार का हाल
सूत्रों के मुताबिक, IDBI Bank के पिछले बिड को इसलिए रद्द कर दिया गया था क्योंकि वे न्यूनतम स्वीकार्य कीमत से काफी कम थे। Fairfax Financial Holdings Ltd. और Emirates NBD PJSC जैसी संस्थाएं पहले भी इसमें रुचि दिखा चुकी थीं। इस साल IDBI Bank के शेयरों में लगभग 32% की भारी गिरावट आई है, जो Nifty Bank Index के 10% के फॉल से कहीं ज्यादा है। अप्रैल में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विनिवेश के प्रति प्रतिबद्धता जताई थी, लेकिन खरीदारों को एक व्यवहार्य वैल्यूएशन (viable valuation) पर आकर्षित करना ही मुख्य चुनौती बनी हुई है।