IDBI Bank ने नॉन-रेजिडेंट इंडियंस (NRIs) के लिए एक नया FCNR(B) डिपॉजिट प्रोडक्ट लॉन्च किया है, जो **16.2%** तक का संभावित रिटर्न दे सकता है। बैंक इस स्कीम के जरिए RBI की इंटरेस्ट रेट रिलैक्सेशन विंडो का फायदा उठाकर NRI कैपिटल को आकर्षित करने की कोशिश कर रहा है।
IDBI Bank का खास 'स्ट्रक्चर्ड लोन फैसिलिटी' वाला ऑफर
IDBI Bank ने हाल ही में नॉन-रेजिडेंट इंडियंस (NRIs) के लिए एक खास डिपॉजिट प्रोडक्ट पेश किया है। इस स्कीम का नाम 'FCNR(B) स्पेशल अपॉर्च्युनिटी डिपॉजिट विद स्ट्रक्चर्ड लोन फैसिलिटी' है। इसकी खासियत यह है कि इसमें ₹50,000 (डॉलर में) जैसी छोटी रकम से भी निवेश शुरू किया जा सकता है, जो दूसरे बैंकों के मुकाबले काफी कम है।
समझें यह 'लीवरेज्ड स्ट्रक्चर'
इस स्कीम का मुख्य आकर्षण इसका लीवरेज्ड स्ट्रक्चर है। इसमें निवेशक अपने डिपॉजिट अमाउंट का 12 गुना तक लोन ले सकते हैं। सबसे खास बात यह है कि लोन पर लगने वाला ब्याज, डिपॉजिट पर मिलने वाले संभावित रिटर्न से कम है। इस अंतर के चलते, निवेशक को सालाना 16.2% तक का प्रभावी रिटर्न मिल सकता है।
अगर निवेश $5 मिलियन से ज्यादा है और टेन्योर 3 से 5 साल के बीच है, तो बैंक 6.60% तक का डॉलर डिपॉजिट रेट ऑफर कर रहा है। वहीं, लोन फैसिलिटी पर सालाना 5.80% से 5.90% ब्याज दर बताई जा रही है।
RBI की भूमिका और बैंकिंग जगत में कॉम्पिटिशन
यह प्रोडक्ट भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के उस फैसले का सीधा नतीजा है, जिसमें 3 से 5 साल के टेन्योर वाले FCNR(B) और NRE डिपॉजिट्स पर इंटरेस्ट रेट कैप को अस्थायी रूप से हटा दिया गया है। RBI ने 30 सितंबर, 2026 तक एक कंसेशनल डॉलर-रुपया स्वैप विंडो भी खोली है, जिससे बैंकों को करेंसी हेजिंग की लागत कम करने में मदद मिलती है। इसका मतलब है कि बैंक बिना अपने नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) को प्रभावित किए, NRIs को ज्यादा ब्याज दरें दे सकते हैं।
IDBI Bank इस रेस में अकेले नहीं है। HSBC और State Bank of India जैसे बैंक भी NRIs को लुभाने के लिए अलग-अलग लीवरेज रेश्यो वाले ऑफर्स दे रहे हैं। IDBI Bank का 12 गुना लीवरेज, HSBC के 19 गुना के मुकाबले कम है, लेकिन यह SBI के 9 गुना से ज्यादा है।
निवेशकों के लिए ध्यान देने वाली बातें:
- इस तरह की स्कीमें डिपॉजिट यील्ड और उधार लागत के बीच के स्प्रेड पर निर्भर करती हैं।
- RBI की स्वैप विंडो सितंबर 2026 तक ही मान्य है। इसके बाद इंटरेस्ट रेट्स या RBI के रुख में बदलाव से इन ऑफर्स की आकर्षणता पर असर पड़ सकता है।
- यह स्कीम उधार लेने से जुड़ी है, इसलिए इंटरेस्ट रेट में उतार-चढ़ाव और लीवरेज से जुड़े जोखिमों को समझना जरूरी है।
