IDBI Bank के विनिवेश पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। कर्मचारी यूनियन ने संसदीय पैनल से शिकायत की है कि बैंक की पुरानी संपत्तियों की कीमत काफी कम आंकी गई है, जिससे **60.72%** हिस्सेदारी बिक्री की डील पर असर पड़ सकता है।
वैल्यूएशन पर विवाद
United Forum of IDBI Officers & Employees ने संसदीय स्टैंडिंग कमेटी से मांग की है कि बैंक के रियल एस्टेट पोर्टफोलियो की नए सिरे से जांच हो। कर्मचारियों का आरोप है कि बैंक की कई दशकों पुरानी संपत्तियों को उनकी हिस्टोरिकल कॉस्ट (Historical Cost) पर दिखाया गया है, जबकि उनकी बाजार कीमत आज कहीं ज्यादा है। उनका तर्क है कि अगर सही मूल्यांकन नहीं हुआ, तो खरीदार को बहुत बड़ा फायदा हो सकता है जो सार्वजनिक हित के खिलाफ है।
डील और दावेदारों की स्थिति
सरकार अपनी 60.72% हिस्सेदारी बेचने की तैयारी में है और Fairfax Financial Holdings इस दौड़ में सबसे आगे है। इस पूरी डील की वैल्यू $5 बिलियन से ज्यादा आंकी जा रही है। IDBI Bank ने एक्सचेंज फाइलिंग में स्पष्ट किया है कि उनके पास कोई ऐसी जानकारी नहीं है जिसे छुपाया गया हो और पूरा विनिवेश DIPAM (Department of Investment and Public Asset Management) की निगरानी में हो रहा है।
RBI और रेगुलेटरी चुनौतियां
विनिवेश की राह में कई प्रशासनिक और रेगुलेटरी चुनौतियां भी हैं। RBI का 'फिट एंड प्रॉपर' टेस्ट सबसे अहम है, खासकर Fairfax के लिए, क्योंकि उनकी पहले से ही CSB Bank में हिस्सेदारी है। ऐसे में कंसोलिडेशन के नियमों पर स्पष्टता जरूरी है। इसके अलावा, संसदीय पैनल ने पहले भी DIPAM में खाली पड़े पदों पर चिंता जताई थी, जिससे इस बड़े सौदे को संभालने की कार्यक्षमता पर सवाल उठ रहे हैं।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
कर्मचारी यूनियन ने बैंक की संपत्तियों के टाइटल की कानूनी ऑडिट की भी मांग की है। निवेशकों के लिए अब शेयर परचेज एग्रीमेंट के अंतिम रूप और रेगुलेटरी मंजूरी की खबरें सबसे महत्वपूर्ण होंगी। यदि सरकार या पैनल इस वैल्यूएशन विवाद पर कोई सख्त कदम उठाता है, तो डील की शर्तों में बदलाव हो सकता है।
