Banking Sector Alert: FY27 में बढ़ सकता है बैंकों का NPA, ICRA की रिपोर्ट ने दी चेतावनी

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Banking Sector Alert: FY27 में बढ़ सकता है बैंकों का NPA, ICRA की रिपोर्ट ने दी चेतावनी

रेटिंग एजेंसी ICRA ने अनुमान जताया है कि फाइनेंशियल ईयर 2027 में भारतीय बैंकों के बैड लोन (Bad Loans) में इजाफा हो सकता है। खास तौर पर अनसिक्योर्ड रिटेल और MSME लोन सेगमेंट में दबाव बढ़ने की आशंका है, जिसकी मुख्य वजह महंगाई और ऊंची ब्याज दरें हैं।

आने वाले फाइनेंशियल ईयर 2026-27 में भारतीय बैंकों के लिए फ्रेश बैड लोन यानी नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPAs) के मोर्चे पर चुनौतियां बढ़ सकती हैं। क्रेडिट रेटिंग एजेंसी ICRA की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा मैक्रो-इकोनॉमिक दबाव कर्जदारों की पेमेंट क्षमता को प्रभावित कर रहा है, जिससे बैंकों को एसेट क्वालिटी में गिरावट के लिए तैयार रहना होगा।

प्राइवेट बैंकों पर ज्यादा दबाव

बैड लोन का यह खतरा पूरे बैंकिंग सिस्टम में एक समान नहीं है। ICRA के डेटा के अनुसार, प्राइवेट सेक्टर के बैंक ज्यादा दबाव में दिख सकते हैं। इनकी फ्रेश स्लिपेज रेट (जो लोन खराब हो रहे हैं) पिछले साल के 1.4% से बढ़कर 1.6% होने का अनुमान है, जो कि कुल ₹1.3 लाख करोड़ के करीब हो सकता है। वहीं, पब्लिक सेक्टर बैंकों की बात करें तो इनकी फ्रेश NPA जनरेशन 0.7% से बढ़कर 0.8% हो सकती है, जिसका आंकड़ा करीब ₹1 लाख करोड़ रहने का अनुमान है।

रिटेल और MSME लोन का संकट

इस तनाव की जड़ अनसिक्योर्ड रिटेल और MSME सेगमेंट में है। लगातार ऊंची ब्याज दरों और महंगाई के कारण इन कैटेगरी के कर्जदारों की जेब पर भारी असर पड़ा है। जब ब्याज का बोझ बढ़ता है, तो छोटे व्यवसायों और रिटेल उधारकर्ताओं की डिस्पोजेबल इनकम कम हो जाती है, जिससे लोन चुकाना मुश्किल हो जाता है। इसके अलावा, ग्लोबल सप्लाई चेन की अनिश्चितताओं ने भी MSMEs की परेशानी बढ़ा दी है।

प्रॉफिटेबिलिटी पर क्या होगा असर?

हालांकि NPA की खबर निवेशकों को डरा सकती है, लेकिन बैंकिंग सेक्टर अब पहले के मुकाबले काफी मजबूत स्थिति में है। बैंकों ने पिछले कुछ सालों में अपनी बैलेंस शीट को काफी साफ-सुथरा रखा है और पर्याप्त कैपिटल बफर बनाए रखे हैं। क्रेडिट कॉस्ट में थोड़ी बढ़ोतरी जरूर हो सकती है, जिससे मुनाफे पर मामूली असर पड़ेगा, लेकिन इसे एक बड़ी सिस्टमिक क्राइसिस के रूप में नहीं देखा जा रहा है।

निवेशकों के लिए आने वाली तिमाहियों में यह देखना अहम होगा कि बैंक अपने लोन बुक की क्वालिटी को कैसे मैनेज करते हैं और रिस्क वाली कैटेगरी में अपनी लेंडिंग स्टैंडर्ड्स को कितना टाइट करते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.