ICICI Prudential AMC ने अपनी निवेश रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। कंपनी अब कंजम्पशन-लिंक्ड शेयरों से अपना पैसा हटाकर मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों में लगा रही है। कमजोर रुपये का फायदा एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड सेक्टर को मिलने की उम्मीद है।
ICICI Prudential Asset Management Company ने अपनी पोर्टफोलियो रणनीति को पूरी तरह से री-अलाइन किया है। कंपनी का मानना है कि भारतीय रुपये में कमजोरी का फायदा घरेलू मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों को मिलेगा, खासकर उन एक्सपोर्टर्स को जो अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी पकड़ मजबूत कर रहे हैं।\n\n### मैन्युफैक्चरिंग पर क्यों है फोकस?\n\nरुपया कमजोर होने से भारतीय सामान अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के लिए सस्ते हो जाते हैं। इसी रणनीति के तहत, AMC ने टेक्सटाइल्स और मेटल्स सेक्टर को अपने फोकस एरिया में रखा है। ये सेक्टर वैश्विक स्तर पर लागत लाभ (cost advantage) उठाने के लिए अच्छी स्थिति में हैं।\n\nहालांकि, निवेशकों को यह याद रखना होगा कि मैन्युफैक्चरिंग, विशेष रूप से मेटल्स और टेक्सटाइल्स, अत्यधिक साइक्लिकल (cyclical) होते हैं। इसका मतलब है कि इनका मुनाफा वैश्विक मांग और कच्चे माल की कीमतों पर निर्भर करता है। यदि ग्लोबल ग्रोथ में सुस्ती आती है, तो मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है।\n\n### IT सेक्टर पर सावधानी\n\nICICI Prudential AMC ने आईटी सेक्टर को लेकर काफी सतर्क रुख अपनाया है। आईटी कंपनियां अपनी कमाई के लिए अमेरिका और यूरोप पर निर्भर हैं। यदि इन देशों की अर्थव्यवस्था में कोई बड़ी गिरावट आती है या वे टेक स्पेंडिंग कम करते हैं, तो भारतीय आईटी कंपनियों के रेवेन्यू पर असर पड़ सकता है। इसलिए, फिलहाल इस सेक्टर में कंपनी ने 'वेट एंड वॉच' की नीति अपनाई है।\n\n### मिड-कैप और स्मॉल-कैप पर दांव\n\nइस रणनीति का एक अहम हिस्सा लार्ज-कैप के बजाय मिड-कैप और स्मॉल-कैप कंपनियों को प्राथमिकता देना है। इनमें तेजी की संभावना तो ज्यादा है, लेकिन बाजार की गिरावट के दौरान इनमें भारी उतार-चढ़ाव (volatility) भी देखने को मिल सकता है। दूसरी तरफ, घरेलू कंजम्पशन सेक्टर अभी खाद्य और ईंधन मुद्रास्फीति (inflation) के कारण दबाव में है, जिसकी वजह से इस क्षेत्र की कंपनियों के नतीजों में सुस्ती देखी गई है।
