ICICI Pru, HDFC AMC: दमदार तिमाही नतीजों से निवेशकों में खुशी, SBI AMC का IPO भी तैयार

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AuthorAditya Rao|Published at:
ICICI Pru, HDFC AMC: दमदार तिमाही नतीजों से निवेशकों में खुशी, SBI AMC का IPO भी तैयार

एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (AMC) के लिए नए फाइनेंशियल ईयर की शुरुआत शानदार रही है। ICICI Prudential AMC और HDFC AMC ने Q1 FY27 में बढ़िया मुनाफा दर्ज किया है, जिसकी वजह SIP (Systematic Investment Plan) के जरिए रिकॉर्ड फंड इनफ्लोज़ हैं। वहीं, SBI AMC ने ₹9,813 करोड़ का IPO लाने का ऐलान किया है, जो सेक्टर में एक बड़े प्लेयर की एंट्री का संकेत है।

रिकॉर्ड SIP इनफ्लोज़ से AMC की कमाई में उछाल

एसेट मैनेजमेंट इंडस्ट्री में रिटेल निवेशकों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। इस तिमाही में इंडस्ट्री का एवरेज एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) ₹83 लाख करोड़ तक पहुंच गया, जो पिछले साल के मुकाबले 15.4% ज्यादा है। इस ग्रोथ की सबसे बड़ी वजह SIP के जरिए लगातार आ रहा पैसा है। मासिक SIP कंट्रीब्यूशन ₹31,781 करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जो पिछले साल से 16.5% अधिक है। खासतौर पर इक्विटी स्कीम्स को इसका सबसे ज्यादा फायदा मिला है, जहाँ इस तिमाही में ₹1 लाख करोड़ से ज्यादा का नेट इनफ्लो हुआ है।

ICICI Pru और HDFC AMC के नतीजे

ICICI Prudential AMC ने इस तिमाही में ₹965 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 23.1% ज्यादा है। वहीं, HDFC AMC का नेट प्रॉफिट 12.1% बढ़कर ₹838 करोड़ रहा। दोनों कंपनियों ने अप्रैल से लागू हुए नए रेगुलेटरी नियमों के बावजूद अपनी कमाई को बनाए रखा है। ICICI Prudential AMC का AUM 18.3% बढ़ा, जबकि इसका रेवेन्यू 17.5% बढ़कर ₹1,564 करोड़ हो गया। HDFC AMC का रेवेन्यू 13.5% बढ़कर ₹1,099 करोड़ रहा। कंपनियों ने नए कमीशन स्ट्रक्चर के साथ तालमेल बिठाते हुए ऑपरेशनल कॉस्ट पर भी फोकस किया है।

SBI AMC का IPO बाजार में दस्तक

SBI AMC, देश की सबसे बड़ी फंड हाउस, ₹9,813 करोड़ का IPO लाने की तैयारी में है। इस IPO से लिस्टेड एसेट मैनेजमेंट कंपनियों के स्पेस में एक नया प्लेयर शामिल होगा। फिलहाल, ICICI Prudential AMC और HDFC AMC जैसे स्टॉक्स अपने फॉरवर्ड प्राइस-टू-अर्निंग मल्टीपल पर करीब 30-33 गुना पर ट्रेड कर रहे हैं। SBI AMC के IPO की प्राइसिंग इन मौजूदा प्लेयर्स के मुकाबले कैसी होगी, यह देखना दिलचस्प होगा।

आगे चलकर, इक्विटी स्कीम्स में डिमांड का ट्रेंड और नए रेगुलेशन्स का असर निवेशकों की नज़रों में रहेगा। कंपनियों को अपना मार्केट शेयर बनाए रखने और ब्रॉडर मार्केट सेंटिमेंट में उतार-चढ़ाव को संभालने की चुनौती होगी। तिमाही SIP कंट्रीब्यूशन और नए फी स्ट्रक्चर का लॉन्ग-टर्म प्रॉफिट मार्जिन पर असर, सेक्टर की हेल्थ को समझने के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।

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