ICICI Prudential AMC का सितंबर तिमाही का प्रदर्शन मिला-जुला रहा है। कंपनी का रेवेन्यू **18%** बढ़कर **₹1,670 करोड़** पर पहुंच गया है, लेकिन बढ़ते खर्चों के चलते नेट प्रॉफिट में केवल **6%** की ही बढ़ोतरी हो पाई है।
मुनाफे पर क्यों लगा ब्रेक?
कंपनी के फाइनेंशियल ईयर 2027 की दूसरी तिमाही के आंकड़े बताते हैं कि टॉप-लाइन में अच्छी ग्रोथ के बावजूद ऑपरेशनल लागत बढ़ने का असर बॉटम-लाइन पर दिखा है। कंपनी का नेट प्रॉफिट बढ़कर ₹890 करोड़ रहा है। इस सुस्ती की बड़ी वजह कंपनी के कुल ऑपरेटिंग खर्चों में 23% का उछाल है, जो ₹460 करोड़ तक पहुंच गए। नतीजतन, नेट प्रॉफिट मार्जिन पिछले तिमाही के 61.7% से गिरकर 53.1% पर आ गया है, हालांकि EBITDA मार्जिन अभी भी 72.6% के मजबूत स्तर पर बना हुआ है।
मार्केट शेयर की चिंता
निवेशकों के लिए सबसे बड़ा सवाल इक्विटी मार्केट शेयर का है, जो पिछले साल के 19% से गिरकर अब 13.8% रह गया है। हालांकि मार्केट में कुल इक्विटी इनफ्लो ₹1.06 लाख करोड़ रहा, लेकिन कंपनी इसमें बड़ा हिस्सा नहीं झटक पाई। एक्सपर्ट्स का मानना है कि स्मॉल और मिड-कैप (SMID) सेगमेंट में कंपनी की सीमित मौजूदगी इसकी एक प्रमुख वजह है।
नई रणनीति: क्या बदलेगी तस्वीर?
इस चुनौती से निपटने के लिए बोर्ड ने ICICI Securities के पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज (PMS) बिजनेस के अधिग्रहण को मंजूरी दे दी है। इस कदम से कंपनी अपने क्लाइंट बेस को बड़ा करने और स्पेशलाइज्ड इन्वेस्टमेंट फंड्स में पैठ बनाने की कोशिश कर रही है, जहां उनका एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) पहले ही दोगुना होकर ₹4,950 करोड़ पहुंच चुका है।
भविष्य की तैयारियों के तौर पर कंपनी नए बैलेंस हाइब्रिड फंड और BSE इंश्योरेंस ETF जैसे प्रोडक्ट भी लॉन्च कर रही है। अब देखना यह है कि क्या ये रणनीतिक बदलाव कंपनी के गिरते मार्केट शेयर को वापस ऊपर ला पाएंगे और क्या खर्चों पर नियंत्रण कर कंपनी मार्जिन को बचा पाएगी।
