ट्रेड डील का सकारात्मक असर
हाल ही में भारत और अमेरिका के बीच हुए ट्रेड समझौते ने भारतीय शेयर बाजारों में जोश भर दिया है। इस समझौते के तहत भारतीय उत्पादों पर लगने वाले टैरिफ में कमी आई है, जिससे वैश्विक व्यापारिक अनिश्चितताएं कम हुई हैं। विश्लेषकों का मानना है कि इससे विदेशी निवेश बढ़ने की उम्मीद है और यह एक व्यापक बाजार रैली का संकेत है, जिसने निफ्टी और सेंसेक्स जैसे प्रमुख सूचकांकों को भी मजबूती दी है। ऐसे अनुकूल माहौल में, एक्सपोर्ट-बेस्ड सेक्टर्स और फाइनेंशियल सर्विसेज जैसी कंपनियों को विशेष लाभ मिलता है, और ICICI Prudential AMC भी इसी का फायदा उठा रही है।
कंपनी के शानदार तिमाही नतीजे
बाजार की इस सकारात्मक चाल के साथ-साथ ICICI Prudential AMC के खुद के नतीजे भी बेहद दमदार रहे हैं। फाइनेंशियल ईयर 2026 की तीसरी तिमाही (Q3FY26) में, कंपनी ने ₹917 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 45.1% अधिक है। वहीं, कंपनी के म्यूचुअल फंड एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) में भी 23.2% की जोरदार बढ़ोतरी हुई है और यह ₹10.8 ट्रिलियन तक पहुंच गया है। इसके साथ ही, कंपनी ने 13.3% मार्केट शेयर के साथ देश की दूसरी सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनी के तौर पर अपनी जगह बनाए रखी है।
IPO से अब तक 44% की उछाल
कंपनी के मजबूत प्रदर्शन को इस बात से भी समझा जा सकता है कि इसके शेयर अपने IPO प्राइस ₹2,165 से अब तक करीब 44% बढ़ चुके हैं। कंपनी का रिटर्न ऑन इक्विटी (RoE) 82.8% है, जो कि इंडस्ट्री में शानदार माना जा रहा है। कंपनी का मार्केट कैप लगभग ₹1.45 ट्रिलियन है, जबकि इसका ट्रेलिंग बारह महीने का P/E रेश्यो 44.8x के आसपास है।
निवेशक गतिविधि और इंडस्ट्री की ग्रोथ
IPO लिस्टिंग (19 दिसंबर, 2025) के बाद से, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) और घरेलू म्यूचुअल फंड्स (MFs) ने ICICI Prudential AMC में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है। वहीं, रिटेल निवेशकों ने मुनाफावसूली की है, जिससे उनकी हिस्सेदारी घटकर 1.99% रह गई है। यह ट्रेंड दिखाता है कि बड़े निवेशक कंपनी के भविष्य को लेकर काफी आश्वस्त हैं। भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री भी पिछले 5 सालों में तीन गुना हो गई है, जो भविष्य में ऐसे एसेट मैनेजमेंट कंपनियों के लिए ग्रोथ के बड़े अवसर पैदा करती है।