ICICI Lombard के लिए फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही चुनौतीपूर्ण रही है। मोटर और फायर इंश्योरेंस क्लेम्स के बोझ के चलते कंपनी का नेट प्रॉफिट **46%** गिरकर **₹403 करोड़** पर आ गया है, जिससे शेयर अपने 52-वीक लो के करीब ट्रेड कर रहा है।
मुनाफे पर क्यों पड़ा असर?
कंपनी के नतीजों में सबसे ज्यादा चिंता का विषय उसका कंबाइंड रेशियो है, जो बढ़कर 107.2% पर पहुंच गया है, जबकि पिछले साल इसी तिमाही में यह 102.9% था। जब यह आंकड़ा 100% के ऊपर होता है, तो इसका मतलब है कि कंपनी प्रीमियम से होने वाली कमाई से ज्यादा पैसा क्लेम्स और खर्चों में चुका रही है। इसका मुख्य कारण फायर इंश्योरेंस के दो बड़े क्लेम और मोटर थर्ड-पार्टी लायबिलिटीज के लिए ₹165 करोड़ का अतिरिक्त प्रोविजन करना रहा है। यह प्रोविजन जून 2026 में आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अनिवार्य हो गया था।
रिटेल हेल्थ का मजबूत सपोर्ट
मुनाफे पर भले ही दबाव हो, लेकिन कंपनी का रिटेल हेल्थ इंश्योरेंस सेगमेंट अभी भी मजबूती दिखा रहा है। इसमें सालाना आधार पर 69.5% की जबरदस्त ग्रोथ दर्ज की गई है, जो इंडस्ट्री औसत से काफी बेहतर है। कंपनी अब ग्रुप हेल्थ की जगह रिटेल हेल्थ पर ज्यादा ध्यान दे रही है, क्योंकि इसमें रिस्क कम होता है और यह रेवेन्यू को बेहतर तरीके से डाइवर्सिफाई करने में मदद करता है।
बाजार की चाल और वित्तीय स्थिति
नतीजों के बाद निवेशकों में घबराहट साफ दिख रही है, जिसकी वजह से शेयर ₹1,510 के लेवल पर, यानी अपने 52-वीक लो के आसपास ट्रेड कर रहा है। हालांकि, कंपनी की वित्तीय स्थिति अभी भी सुरक्षित है। कंपनी का सॉल्वेंसी रेशियो 2.71x है, जो रेगुलेटर की 1.50x की न्यूनतम जरूरत से काफी बेहतर है।
आने वाले समय में मार्जिन को सुधारने के लिए कंपनी को क्लेम्स मैनेजमेंट को और बेहतर करना होगा, साथ ही मोटर थर्ड-पार्टी प्रीमियम में बढ़ोतरी की उम्मीदें भी बनी हुई हैं। निवेशकों की नजर अब इस पर होगी कि क्या कंपनी अपने मार्जिन को वापस पुराने लेवल पर ला पाती है या नहीं।
