ICICI Bank Share Price: रिकॉर्ड हाई के करीब पहुंचा शेयर, जानिए क्यों तेजी पर हैं एनालिस्ट

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AuthorAditya Rao|Published at:
ICICI Bank Share Price: रिकॉर्ड हाई के करीब पहुंचा शेयर, जानिए क्यों तेजी पर हैं एनालिस्ट

ICICI Bank के शेयरों में शानदार तेजी, स्टॉक **3%** चढ़कर **₹1,374** पर पहुंचा। एनालिस्ट्स इस बैंक की डिजिटल ताकत, मजबूत कैपिटल बफर और लगातार लोन ग्रोथ से काफी उत्साहित हैं।

क्या हुआ?

बुधवार को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर ICICI Bank के शेयरों में 3% की उछाल देखी गई, जिससे यह ₹1,374 के स्तर पर पहुंच गया। इस तेजी के साथ ही बैंक का स्टॉक अपने रिकॉर्ड हाई ₹1,500 (जो जुलाई 2025 में बना था) के करीब आ गया है। साल 2026 में अब तक, जहां बेंचमार्क निफ्टी 50 इंडेक्स 8% गिरा है, वहीं ICICI Bank के शेयर में 3% की बढ़ोतरी हुई है। पिछले एक महीने में स्टॉक 9% चढ़ा है, जो बाजार की चाल से कहीं बेहतर है।

एनालिस्ट्स क्यों हैं उत्साहित?

कई ब्रोकरेज फर्मों ने ICICI Bank के शेयर पर पॉजिटिव आउटलुक बनाए रखा है, जिनमें टारगेट प्राइस ₹1,783 से लेकर ₹1,860 तक है। एनालिस्ट्स इस आशावाद का श्रेय बैंक की मजबूत वित्तीय स्थिति और असरदार डिजिटल रणनीति को दे रहे हैं। बैंक के iMobile ऐप की लोकप्रियता को एक मुख्य वजह बताया जा रहा है, जिसने इसे मार्केट शेयर हासिल करने और युवा, टेक-सेवी ग्राहकों को आकर्षित करने में मदद की है। एनालिस्ट्स ने यह भी बताया कि बैंक की रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) लगातार 18% से ऊपर बनी हुई है, जो दिखाता है कि बैंक लाभ कमाने के लिए शेयरधारक पूंजी का कितनी कुशलता से उपयोग कर रहा है।

वित्तीय मजबूती का आधार

निवेशकों के लिए ICICI Bank की बैलेंस शीट की मजबूती एक प्रमुख आकर्षण है। बैंक का CET-1 रेशियो 16.4% है, जो वित्तीय तनाव झेलने की उसकी कोर कैपिटल स्ट्रेंथ को दर्शाता है। इसके अलावा, बैंक के पास 84 बेसिस पॉइंट्स का प्रोविजन बफर है, जो संभावित बैड लोंस के खिलाफ एक सुरक्षा कवच प्रदान करता है। बैंक का एक बड़ा फायदा यह है कि उसके पास सेविंग्स और करंट अकाउंट डिपॉजिट्स का एक बड़ा हिस्सा है। ये कम लागत वाले फंड बैंक को प्रतिस्पर्धियों पर फंडिंग का लाभ देते हैं, जिससे बाजार की ब्याज दरें ऊंची होने पर भी वह अपने ब्याज खर्च को नियंत्रण में रख पाता है।

सेक्टर की चुनौतियाँ

हालांकि बैंक के लिए आउटलुक मजबूत बना हुआ है, लेकिन पूरा बैंकिंग सेक्टर फिलहाल कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बैंक डिपॉजिट्स के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना कर रहे हैं, जिससे फंडिंग कॉस्ट बढ़ सकती है और प्रॉफिट मार्जिन कम हो सकता है। इसके अलावा, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने जून 2026 की अपनी पॉलिसी मीटिंग में रेपो रेट को 5.25% पर बरकरार रखा है और वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण GDP ग्रोथ के अनुमान को घटाकर 6.6% कर दिया है। निवेशकों को यह ध्यान देना चाहिए कि बैंक ने लचीलापन दिखाया है, लेकिन उसका प्रदर्शन अभी भी भारतीय अर्थव्यवस्था के समग्र स्वास्थ्य और ब्याज दर चक्र से जुड़ा हुआ है।

निवेशकों को क्या देखना चाहिए?

आगे चलकर, बैंक के लिए मुख्य देखने लायक बातें यह होंगी कि वह प्रतिस्पर्धी माहौल में लोन ग्रोथ को कैसे बनाए रखता है और रिटेल डिपॉजिट्स को आकर्षित करने में कितना सफल होता है। निवेशक मैनेजमेंट की क्रेडिट कॉस्ट पर टिप्पणी पर भी नजर रख सकते हैं, क्योंकि वर्तमान लाभप्रदता को बनाए रखने के लिए खराब लोन के स्तर को कम रखना महत्वपूर्ण होगा। आने वाले तिमाही नतीजों से यह पता चलेगा कि बैंक अस्थिर आर्थिक माहौल में उच्च विकास को स्थिर एसेट क्वालिटी के साथ संतुलित करना जारी रख सकता है या नहीं।

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