ICICI Bank का बड़ा कदम: ₹6,200 करोड़ जुटाए विदेशी बॉन्ड से, 5.417% की दर से मिला पैसा

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AuthorMehul Desai|Published at:
ICICI Bank का बड़ा कदम: ₹6,200 करोड़ जुटाए विदेशी बॉन्ड से, 5.417% की दर से मिला पैसा

ICICI Bank ने विदेशी बाजारों से **$750 मिलियन** (लगभग **₹6,200 करोड़**) की बड़ी राशि सफलतापूर्वक जुटाई है। यह पैसा 5 साल के ओवरसीज बॉन्ड के जरिए आया है, जिसकी कूपन रेट **5.417%** रखी गई है। इस फंड का इस्तेमाल बैंक अपने बिजनेस ग्रोथ के लिए करेगा। खास बात यह है कि यह करीब एक महीने में बैंक का तीसरा डॉलर-डिनॉमिनेटेड (dollar-denominated) फंडरेज़िंग है, जो अंतरराष्ट्रीय निवेशकों की मजबूत मांग को दर्शाता है।

कैसे जुटाई गई यह राशि?

ICICI Bank ने 5-साल के सीनियर अनसिक्योर्ड फिक्स्ड-रेट नोट्स (senior unsecured fixed-rate notes) जारी कर $750 मिलियन का फंड जुटाने का सौदा पूरा किया है। बैंक ने यह ट्रांजेक्शन गुजरात के GIFT City स्थित अपनी इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर (IFSC) बैंकिंग यूनिट के जरिए किया है। इन बॉन्ड्स की मैच्योरिटी (maturity) 21 अगस्त, 2031 को होगी और इन पर 5.417% का कूपन रेट मिलेगा।

निवेशकों का दिखा जबरदस्त भरोसा

यह कैपिटल रेज (capital raise) बैंक के $7.5 बिलियन के ग्लोबल मीडियम टर्म नोट प्रोग्राम (Global Medium Term Note Programme) का हिस्सा है। इस इश्यू को निवेशकों से ज़बरदस्त रिस्पॉन्स मिला, जिसमें $2 बिलियन से ज़्यादा के बिड्स आए। इस मजबूत डिमांड के चलते बैंक ने प्राइसिंग स्प्रेड (pricing spread) को इनिशियल गाइडेंस (initial guidance) 130 बेसिस पॉइंट्स से टाइट करके 105 बेसिस पॉइंट्स ओवर यूएस ट्रेज़री (US Treasuries) पर ला दिया। इन नोट्स को इंडिया इंटरनेशनल एक्सचेंज (India International Exchange), NSE IFSC और सिंगापुर एक्सचेंज (Singapore Exchange) पर लिस्ट किया जाएगा।

लगातार फंड जुटा रहा है बैंक

यह ट्रांजेक्शन बैंक के लिए फंड जुटाने की एक एक्टिव अवधि को दर्शाता है। लगभग एक महीने में यह बैंक का तीसरा डॉलर-डिनॉमिनेटेड बॉन्ड इश्यू है, जिससे इस दौरान कुल जुटाई गई राशि $2.05 बिलियन हो गई है। बैंक इस फंड का इस्तेमाल सामान्य कॉर्पोरेट उद्देश्यों के लिए करेगा, जिसमें लेंडिंग एक्टिविटीज (lending activities) को सपोर्ट करना और बिजनेस एक्सपेंशन (business expansion) को फंड करना शामिल है। IFSC यूनिट का उपयोग करके, बैंक अपनी अंतरराष्ट्रीय फंडिंग की जरूरतों के लिए GIFT City को एक प्रमुख हब के रूप में इस्तेमाल करना जारी रखेगा।

आगे क्या?

हालांकि इस सफल फंडरेज़िंग से बाजार में बैंक के डेट (debt) के लिए मजबूत मांग और लिक्विडिटी (liquidity) का पता चलता है, लेकिन निवेशक अक्सर ऐसे हालातों में व्यापक मैक्रोइकॉनॉमिक फैक्टर्स (macroeconomic factors) पर भी नज़र रखते हैं। उधार लेने की लागत (cost of borrowing) और बैंक को अंतिम लाभ वैश्विक ब्याज दर चक्र (global interest rate cycles) और करेंसी के उतार-चढ़ाव पर निर्भर करेगा। बैंक हेजिंग स्ट्रेटेजी (hedging strategies) का इस्तेमाल करता है, फिर भी फॉरेन करेंसी डेट (foreign currency debt) के लिए करेंसी की अस्थिरता (currency volatility) एक सामान्य चिंता बनी रहती है। इसके अलावा, जैसे-जैसे बैंक अपना ऑफशोर उधार बढ़ाता है, बाजार आमतौर पर यह मॉनिटर करता है कि इन फंड्स को कैसे डिप्लॉय किया जा रहा है ताकि डेट की लागत से ज़्यादा रिटर्न जेनरेट हो सके। शेयरधारकों के लिए मुख्य बात बैंक की भविष्य की एसेट ग्रोथ (asset growth) होगी और क्या वह इन नए संसाधनों का उपयोग करके अपने लोन बुक का विस्तार करते हुए स्थिर मार्जिन बनाए रखता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.