ICICI Bank शनिवार को अपने सितंबर तिमाही के नतीजे जारी करने वाला है। एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि कंपनी का नेट प्रॉफिट **8% से 14%** तक बढ़ सकता है। हालांकि, लोन और डिपॉजिट में मजबूती के बावजूद निवेशकों की नजर नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) में संभावित **15 बेसिस पॉइंट** की गिरावट पर टिकी है।
ICICI Bank शनिवार को सितंबर 2026 में समाप्त हुई दूसरी तिमाही के अपने फाइनेंशियल नतीजे पेश करेगा। इस बार निवेशकों और एनालिस्ट्स की नजरें ग्रोथ और प्रॉफिटेबिलिटी के बीच संतुलन पर टिकी हैं। पिछले साल की तुलना में नेट प्रॉफिट में 8% से 14% तक की बढ़त की उम्मीद है, लेकिन मार्जिन के मोर्चे पर चिंताएं बनी हुई हैं।
मार्जिन पर दबाव
बैंक का नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM), जो लोन पर मिलने वाली ब्याज और डिपॉजिट पर चुकाई जाने वाली ब्याज का अंतर है, उसमें पिछली तिमाही के मुकाबले करीब 15 बेसिस पॉइंट की गिरावट देखने को मिल सकती है। बैंक डिपॉजिट जुटाने के लिए ऊंची ब्याज दरें दे रहे हैं, जिससे उनकी लागत बढ़ रही है और मार्जिन पर दबाव दिख रहा है।
लोन और डिपॉजिट ग्रोथ
बैंक का लोन बुक मजबूत नजर आ रहा है, जो ₹17.78 लाख करोड़ तक पहुंच सकता है। यह पिछले साल के मुकाबले 26% की बड़ी उछाल होगी। वहीं, डिपॉजिट के मामले में भी बैंक ₹20.17 लाख करोड़ के आंकड़े को छू सकता है, जो सालाना आधार पर 25% ज्यादा है। यह दिखाता है कि बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए बैंक आक्रामक रणनीति अपना रहा है।
रिस्क और रेगुलेटरी सख्ती
निवेशकों के लिए सबसे अहम है लोन क्वालिटी। अनसिक्योर्ड लोन (पर्सनल लोन और क्रेडिट कार्ड) को लेकर Reserve Bank of India काफी सख्त है। मार्केट यह देखना चाहेगा कि मैनेजमेंट का इस रेगुलेटरी सख्ती पर क्या रुख रहता है। वहीं, बैंक के ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (GNPA) के 1.3% के आसपास रहने का अनुमान है।
चूंकि HDFC Bank और Axis Bank जैसे दिग्गज भी अपने नतीजे पेश कर रहे हैं, इसलिए बैंक का भविष्य का आउटलुक और क्रेडिट कॉस्ट पर मैनेजमेंट की टिप्पणी शेयर की चाल तय करने में बड़ी भूमिका निभाएगी।
