ICICI Bank ने सितंबर तिमाही के शानदार नतीजे पेश किए हैं। बैंक का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट **22.3%** बढ़कर **₹16,333 करोड़** हो गया है। लोन बुक में **30%** की जोरदार वृद्धि देखी गई है, हालांकि नेट इंटरेस्ट मार्जिन में मामूली दबाव है।
मुनाफे की रफ्तार और बिजनेस ग्रोथ
सितंबर तिमाही में ICICI Bank का प्रदर्शन काफी मजबूत रहा है। बैंक का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट ₹16,333.18 करोड़ दर्ज किया गया, जो पिछले साल इसी अवधि में ₹13,357.06 करोड़ था। वहीं, स्टैंडअलोन आधार पर बैंक का मुनाफा 20.1% बढ़कर ₹14,843 करोड़ रहा। बैंक की इस कामयाबी के पीछे मुख्य हाथ इसकी 30% की क्रेडिट ग्रोथ का है। अगर हम कुछ अंतरराष्ट्रीय शाखाओं के विशेष लोन को हटा दें, तो भी ऑर्गैनिक ग्रोथ 24.1% रही है, जो बाजार में लोन की मजबूत मांग को दर्शाता है।
मार्जिन पर दबाव और डिपॉजिट ग्रोथ
बैंक का वॉल्यूम तो बढ़ा है, लेकिन नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) में थोड़ी गिरावट देखी गई है। यह 0.12% घटकर 4.18% पर आ गया है। दरअसल, डिपॉजिट पर बढ़ती लागत की वजह से बैंक के मार्जिन पर दबाव बना है। हालांकि, बैंक ने अपनी लिक्विडिटी को बनाए रखने के लिए 27.1% की डिपॉजिट ग्रोथ हासिल की है, जो बैंक की मजबूत फंडिंग क्षमता को दिखाता है।
एसेट क्वालिटी में सुधार
बैंक की सेहत का सबसे बड़ा संकेत उसके बैड लोन्स (Bad Loans) से मिलता है, और यहाँ स्थिति काफी बेहतर हुई है। ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (GNPA) रेशियो सुधरकर 1.20% पर आ गया है, जो पिछले साल 1.58% था। इसी कारण बैंक ने अपने प्रोविजनिंग और कंटीन्जेंसी बजट को भी घटाकर ₹850.69 करोड़ कर दिया है।
कैपिटल एडिक्वेसी और भविष्य की राह
बैंक का कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो 16.68% पर बना हुआ है, जो पिछले साल 15.76% था। यह इस बात का प्रमाण है कि बैंक के पास किसी भी आर्थिक झटके से निपटने के लिए मजबूत बफर मौजूद है। अब निवेशकों की नजर इस बात पर होगी कि क्या बैंक बढ़ते हुए लोन बुक के साथ अपने मार्जिन को मैनेज कर पाएगा या नहीं। लो-कॉस्ट डिपॉजिट जुटाना आने वाले दिनों में बैंक के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता रहेगी।
