ICICI Bank ने वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही के लिए अपने नतीजे जारी कर दिए हैं। बैंक का मुनाफा पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले **16%** बढ़कर **₹14,805 करोड़** हो गया है। नेट इंटरेस्ट इनकम में **13%** की वृद्धि और प्रोविजन्स में **31%** की भारी कमी इस ग्रोथ के पीछे के मुख्य कारण रहे।
ICICI Bank के तिमाही नतीजे
ICICI Bank ने 30 जून, 2026 को समाप्त हुई पहली तिमाही के लिए ₹14,805 करोड़ का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट घोषित किया है। यह पिछले साल की इसी तिमाही में दर्ज किए गए ₹12,768 करोड़ के मुनाफे की तुलना में 16% की जोरदार बढ़ोतरी है। इस शानदार प्रदर्शन के पीछे बैंक की कोर इनकम में बढ़ोतरी और लोन के नुकसान के लिए रखे गए प्रोविजन्स (Provisions) में की गई भारी कमी मुख्य वजह रही।
आय में जबरदस्त उछाल
बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम (Net Interest Income - NII), जो कि लोन पर अर्जित ब्याज और डिपॉजिट पर दिए गए ब्याज के बीच का अंतर है, 13% बढ़कर ₹24,384 करोड़ तक पहुंच गई। वहीं, नॉन-इंटरेस्ट इनकम, जो फीस, कमीशन और अन्य सेवाओं से आती है, 16% बढ़कर ₹8,425 करोड़ दर्ज की गई। सबसे खास बात यह रही कि प्रोविजन्स में 31% की कमी आई और यह घटकर ₹1,260 करोड़ रह गया, जो कि बैंक की एसेट क्वालिटी में सुधार का संकेत देता है।
लोन बुक और NIMs में मजबूती
बैंक का ग्रॉस एडवांसेज़ (Gross Advances) 20% बढ़कर ₹16,31,260 करोड़ पर पहुंच गया। खासकर रूरल पोर्टफोलियो में 35.4% और बिजनेस बैंकिंग सेगमेंट में 28.2% की मजबूत ग्रोथ देखी गई। कॉर्पोरेट और रिटेल लोन सेगमेंट में क्रमशः 18.5% और 12% का इजाफा हुआ। बैंक का नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM), जो बैंक की प्रॉफिटेबिलिटी का अहम पैमाना है, 4.36% रहा, जो पिछले साल के 4.34% से मामूली रूप से बेहतर है। मैनेजमेंट का कहना है कि इस मार्जिन पर टैक्स रिफंड जैसे फैक्टर का भी असर रहा, जबकि भविष्य में यह ब्याज दरों की स्थिरता और डिपॉजिट बेस की संरचना पर निर्भर करेगा।
डिपॉजिट ग्रोथ और भविष्य की चुनौतियां
जून 2026 के अंत तक कुल डिपॉजिट 14% बढ़कर ₹18,33,586 करोड़ हो गया। हालांकि, करंट और सेविंग्स अकाउंट (CASA) का औसत अनुपात 38.1% पर रहा, जो पिछले साल के 38.7% से थोड़ा कम है। ट्रेजरी इनकम में गिरावट (जो ₹1,241 करोड़ से घटकर ₹151 करोड़ रह गई) ने कुल आय में बढ़ोतरी को कुछ हद तक संतुलित किया।
यह सच है कि बैंक की लोन बुक लगातार बढ़ रही है, लेकिन बैंकिंग सेक्टर को डिपॉजिट जुटाने में चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि बैंक क्रेडिट ग्रोथ को फंड करने के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। निवेशकों की नजरें इस बात पर रहेंगी कि क्या बैंक बिना लागत बढ़ाए डिपॉजिट ग्रोथ की रफ्तार बनाए रख पाता है, और आने वाली तिमाहियों में ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव उसके नेट इंटरेस्ट मार्जिन को कैसे प्रभावित करता है।
