ICICI Bank ने FY27 की पहली तिमाही में शानदार नतीजे पेश किए हैं। बैंक का नेट प्रॉफिट पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 16% बढ़कर ₹14,800 करोड़ पर पहुंच गया है। इस दमदार परफॉर्मेंस के पीछे मुख्य वजह मजबूत लोन ग्रोथ और बढ़ी हुई फी इनकम रही।
मुनाफे में 16% का उछाल
ICICI Bank ने वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही (Q1FY27) में दमदार प्रदर्शन करते हुए ₹14,800 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है। यह पिछले साल की समान तिमाही के मुकाबले 16% की जोरदार बढ़ोतरी है। बैंक के लोन पोर्टफोलियो में 19.6% का इजाफा हुआ, वहीं फी इनकम (Fee Income) में 23% की वृद्धि देखी गई। इस दौरान बैंक के बिजनेस बैंकिंग, रूरल लेंडिंग और मॉर्गेज सेगमेंट में अच्छी खासी ग्रोथ दर्ज की गई।
प्रॉफिटेबिलिटी और मार्जिन की स्थिति
तिमाही के लिए बैंक का नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) 4.36% रहा, जो पिछले तिमाही से 4 बेसिस पॉइंट अधिक है। एक बार के टैक्स रिफंड जैसे फैक्टर को एडजस्ट करने के बाद, यह 4.28% पर स्थिर रहा। बैंक का रिटर्न ऑन एसेट्स (ROA) 2.5% और रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) 17.1% रहा, जो कैपिटल के कुशल इस्तेमाल का संकेत देता है।
एसेट क्वालिटी और क्रेडिट मैनेजमेंट
बैंक की एसेट क्वालिटी मजबूत बनी हुई है। ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (GNPA) 1.45% पर स्थिर हैं, जबकि नेट नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NNPA) 0.36% पर हैं। नेट स्लिपेज (Net Slippages) में थोड़ी बढ़ोतरी देखी गई, लेकिन NCLT के एक पुराने मामले से हुई रिकवरी के चलते कुल क्रेडिट कॉस्ट (Credit Cost) पर ज्यादा असर नहीं पड़ा। मैनेजमेंट ने पूरे फाइनेंशियल ईयर के लिए क्रेडिट कॉस्ट 50 बेसिस पॉइंट के आसपास रहने का अनुमान जताया है, जो भविष्य के संभावित जोखिमों के प्रति बैंक की सतर्कता को दर्शाता है।
डिपॉजिट ग्रोथ और लिक्विडिटी
लोन ग्रोथ 19.6% की तुलना में बैंक की डिपॉजिट ग्रोथ 14% रही। इस अंतर के कारण बैंक का क्रेडिट-डिपॉजिट रेशियो बढ़कर 89% हो गया है। भारतीय बैंकिंग सेक्टर में, उच्च क्रेडिट-डिपॉजिट रेशियो टाइट लिक्विडिटी का संकेत देता है, जिससे भविष्य में लोन ग्रोथ को फंड करने के लिए बैंकों को डिपॉजिट जुटाने में अधिक प्रतिस्पर्धा करनी पड़ सकती है। मैनेजमेंट का मानना है कि फॉरेन करेंसी नॉन-रेजिडेंट (FCNR) डिपॉजिट्स के अनुकूल डायनामिक्स आने वाली तिमाहियों में इस बैलेंस को मैनेज करने में मदद कर सकते हैं।
निवेशक बैंक की मार्जिन को बनाए रखने और ऑपरेटिंग खर्चों को रेवेन्यू ग्रोथ के मुकाबले कंट्रोल करने की क्षमता पर नजर रखेंगे। मैनेजमेंट का फोकस कस्टमर एक्विजिशन और डिजिटल सर्विसेज पर केंद्रित रणनीति के जरिए प्रॉफिट बिफोर टैक्स (PBT) को बढ़ाना है।
