नतीजों से मजबूती, पर खर्चों पर भी नजर
ICICI Bank ने वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही (Q4 FY26) के लिए अपने शानदार नतीजे पेश किए हैं। बैंक का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट 8.5% बढ़कर ₹13,702 करोड़ हो गया है, जो पिछले साल की समान तिमाही से काफी बेहतर है।
इस ग्रोथ का मुख्य सहारा नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) रही, जो 8.4% बढ़कर ₹22,979 करोड़ पर पहुंच गई। वहीं, नॉन-इंटरेस्ट इनकम में भी 5.6% का इजाफा देखा गया, जो ₹7,415 करोड़ रही। खास बात यह है कि बैंक का नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) 4.32% पर स्थिर बना रहा, जबकि बाजार को इसमें गिरावट की उम्मीद थी। पूरे फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के लिए, बैंक का प्रॉफिट आफ्टर टैक्स 6.2% बढ़कर ₹50,147 करोड़ दर्ज किया गया।
एसेट क्वालिटी में सुधार, प्रोविजन में भारी कटौती
बैंक की एसेट क्वालिटी में भी लगातार सुधार देखने को मिल रहा है। ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (GNPA) रेश्यो घटकर 1.40% पर आ गया है। यह पिछले तिमाही के 1.53% और एक साल पहले के 1.67% से काफी कम है।
प्रोविजन (प्रावधान) में भारी कमी आई है, जो 89% घटकर मात्र ₹96 करोड़ रह गया है। यह पिछले साल की समान तिमाही में ₹891 करोड़ था। GNPA में यह सुधार और प्रोविजन में इतनी बड़ी गिरावट बैंक की बेहतर क्रेडिट परफॉरमेंस को दर्शाती है, हालांकि कुछ जानकारों का मानना है कि यह किसी बड़े राइट-ऑफ या एकमुश्त रिकवरी का नतीजा भी हो सकता है।
सेक्टर की चुनौतियां और प्रतिस्पर्धी माहौल
यह नतीजे ऐसे समय आए हैं जब भारतीय बैंकिंग सेक्टर कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। ग्लोबल अनिश्चितताएं और भू-राजनीतिक तनावों के चलते Nifty Bank index में फरवरी से मार्च 2026 के अंत तक 17% से अधिक की गिरावट आई। महंगाई बढ़ने और GDP ग्रोथ के धीमे होने की चिंताएं भी बरकरार हैं।
इस माहौल में, HDFC Bank जैसे बड़े बैंकों की मार्केट वैल्यू में 26% से अधिक की गिरावट आई, जबकि ICICI Bank का वैल्यूएशन करीब 10% ही घटा। HDFC Bank का Q4 FY26 नेट प्रॉफिट 9% बढ़कर ₹19,221 करोड़ रहा। Axis Bank का PE रेश्यो करीब 16x और मार्केट कैप ₹4.2 लाख करोड़ के आसपास है, वहीं ICICI Bank का PE रेश्यो 17-18x के करीब है, जो HDFC Bank के बराबर ही है।
खर्चों में बढ़ोतरी और आगे की राह
हालांकि, कुछ ऐसे पहलू भी हैं जिन पर ध्यान देना जरूरी है। बैंक के ऑपरेटिंग एक्सपेंसेस (परिचालन व्यय) में 12% की बढ़ोतरी हुई है, जो ₹12,089 करोड़ तक पहुंच गए। यह दर नेट प्रॉफिट और नेट इंटरेस्ट इनकम की ग्रोथ से कहीं ज्यादा है। इससे भविष्य में लाभप्रदता पर दबाव पड़ सकता है।
प्रोविजन में 89% की यह जबरदस्त गिरावट भले ही बेहतर एसेट क्वालिटी का संकेत हो, लेकिन यह भविष्य के जोखिमों को छिपा सकती है या किसी एकमुश्त रिकवरी को दर्शा सकती है। कई विश्लेषकों को पहले से ही मार्जिन पर दबाव और धीमी ग्रोथ की आशंका थी, ऐसे में बढ़ती फंडिंग लागतों और प्रतिस्पर्धी माहौल में इन नतीजों की स्थिरता पर कुछ सवाल उठ सकते हैं।
विश्लेषकों की राय और डिविडेंड
इसके बावजूद, वॉल स्ट्रीट के विश्लेषकों का नजरिया ICICI Bank पर काफी हद तक सकारात्मक बना हुआ है। कई ब्रोकरेज फर्मों ने इसे 'Strong Buy' रेटिंग दी है। उनके 12-महीने के टारगेट प्राइस 19-23% के अपसाइड का संकेत दे रहे हैं, जो ₹1,610 से ₹1,700 के बीच हो सकते हैं।
विश्लेषकों ने बैंक की मजबूत लोन ग्रोथ, डिपॉजिट बेस और स्थिर एसेट क्वालिटी की खूब सराहना की है। प्रबंधन का फोकस लोन पोर्टफोलियो को और विस्तृत करने और डिपॉजिट मैनेजमेंट को बेहतर बनाने पर रहेगा। बैंक के बोर्ड ने शेयरधारकों की मंजूरी के बाद FY26 के लिए ₹12 प्रति शेयर के अंतिम डिविडेंड की सिफारिश की है, जो बैंक के मजबूत वित्तीय प्रदर्शन को दिखाता है।