ICICI Bank ने नए फाइनेंशियल ईयर की शानदार शुरुआत की है! Q1 FY27 में बैंक के लोन में **20%** की ग्रोथ और नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) **4.36%** रहा, जो कि HDFC Bank के **16%** ग्रोथ और **3.4%** NIM से बेहतर है। HDFC Bank अभी भी मर्जर के बाद की चुनौतियों और महंगे कर्ज से जूझ रहा है।
नए वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही (Q1 FY27) में ICICI Bank ने अपने बड़े प्रतिद्वंदी HDFC Bank को कई अहम बैंकिंग पैमानों पर पीछे छोड़ दिया है। ICICI Bank की लोन बुक पिछले साल के मुकाबले लगभग 20% बढ़कर ₹16.3 ट्रिलियन पर पहुंच गई। यह इंडस्ट्री की 18.6% की औसत क्रेडिट ग्रोथ से भी ज्यादा है। वहीं, HDFC Bank की लोन बुक 16% बढ़कर ₹30.4 ट्रिलियन रही।
ICICI Bank की बढ़त: मार्जिन और मुनाफे पर एक नज़र
ICICI Bank के लिए मुनाफे का ट्रेंड भी पॉजिटिव रहा। बैंक का नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM), जो कि कमाए गए ब्याज और दिए गए ब्याज के बीच का अंतर है, पिछली तिमाही के मुकाबले 4 बेसिस पॉइंट बढ़कर 4.36% पर पहुंच गया। बैंक के नेट प्रॉफिट में 16% की बढ़ोतरी हुई और यह ₹14,800 करोड़ रहा। वहीं, बैंक के रिटर्न ऑन एसेट्स (ROA) में भी सुधार हुआ और यह 2.5% दर्ज किया गया।
HDFC Bank के सामने मर्जर और मार्जिन का दबाव
HDFC Bank अभी भी 2023 में HDFC Ltd. के साथ हुए मर्जर के बाद के इंटीग्रेशन प्रोसेस को मैनेज कर रहा है। बैंक ने इस तिमाही में डिपॉजिट्स में 15% की ग्रोथ दर्ज की, लेकिन 96% के ऊंचे लोन-टू-डिपॉजिट रेश्यो के कारण वह ICICI Bank की तरह आक्रामक तरीके से लोन बुक बढ़ाने में सीमित रहा। यह रेश्यो बताता है कि बैंक अपने डिपॉजिट्स का बड़ा हिस्सा पहले ही लोन में दे चुका है, जिससे तुरंत और तेजी से लोन बढ़ाने के लिए कम गुंजाइश बची है।
इसके अलावा, HDFC Bank मर्जर से मिले महंगे कर्ज से भी जूझ रहा है। इसी वजह से बैंक का नेट इंटरेस्ट मार्जिन इस तिमाही में घटकर 3.4% पर आ गया। बैंक का CASA (करंट अकाउंट सेविंग्स अकाउंट) रेश्यो भी 32% रहा, जो ICICI Bank के लगभग 40% के मुकाबले कम है। कम CASA रेश्यो का मतलब है कि बैंक को महंगे फंड्स पर ज्यादा निर्भर रहना पड़ता है, जिससे मुनाफे पर दबाव पड़ता है।
एसेट क्वालिटी और भविष्य का आउटलुक
दोनों बैंकों के लिए एसेट क्वालिटी (NPA) मोटे तौर पर स्थिर बनी हुई है। HDFC Bank का ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (NPA) रेश्यो 1.2% रहा, जो ICICI Bank के 1.4% से थोड़ा बेहतर है। हालांकि, HDFC Bank के मर्जर के बाद की चुनौतियों ने मार्केट सेंटिमेंट को प्रभावित किया है। पिछले एक साल में HDFC Bank के शेयरों में लगभग 22% की गिरावट आई है, जबकि ICICI Bank के शेयर में स्थिरता देखी गई है।
HDFC Bank अपनी चुनौतियों से निपटने के लिए, महंगे कर्ज को रिटेल टर्म डिपॉजिट से बदलने की योजना बना रहा है, जिससे अगले दो सालों में फंड की लागत 100 बेसिस पॉइंट से ज्यादा कम होने का अनुमान है। बैंक अपने हाई-यील्डिंग रिटेल लोन पोर्टफोलियो का हिस्सा 60% तक बढ़ाने पर भी फोकस कर रहा है। निवेशक इन कोशिशों के साथ-साथ नए नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन राजीव कुमार की स्थिरता और मैनेजमेंट लीडरशिप से जुड़े भविष्य के अपडेट्स पर नजर रखेंगे, ताकि यह देखा जा सके कि बैंक ICICI Bank के साथ अपने वैल्यूएशन गैप को कब तक पाट पाता है।
