Nifty 50 में ICICI Bank का वेटेज रिकॉर्ड **9.45%** के स्तर पर पहुंच गया है। अब यह मार्केट लीडर HDFC Bank से महज **40 बेसिस पॉइंट्स** पीछे है। HDFC Bank के शेयरों में **2026** में आई **29%** की गिरावट ने इंडेक्स के पावर बैलेंस को पूरी तरह से बदल दिया है।
इंडेक्स में बदलती ताकत की कहानी
सितंबर 2026 की शुरुआत तक ICICI Bank ने Nifty 50 में 9.45% की अब तक की सबसे ऊंची हिस्सेदारी दर्ज की है। वहीं, HDFC Bank का वेटेज करीब 9.85% पर है। इन दोनों दिग्गजों के बीच का अंतर सिमटकर महज 40 बेसिस पॉइंट्स रह गया है, जो प्राइवेट बैंकिंग सेक्टर में एक बड़े बदलाव का संकेत है।
क्यों दबाव में है HDFC Bank?
ICICI Bank की यह बढ़त सिर्फ उसकी अपनी रफ्तार नहीं, बल्कि HDFC Bank की चुनौतियों का भी नतीजा है। साल 2026 में HDFC Bank के शेयर में 28% से 29% की भारी गिरावट आई है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अक्टूबर 2026 में CEO का कार्यकाल खत्म होने से जुड़ी अनिश्चितताएं और गवर्नेंस से जुड़ी चिंताएं इसकी मुख्य वजह हैं। अगस्त के अंत तक दोनों बैंकों के बीच मार्केट कैप का अंतर 11 साल के निचले स्तर यानी ₹49,167 करोड़ पर आ गया है।
निवेशकों के लिए क्या हैं मायने?
इंडेक्स में वेटेज बढ़ने का मतलब है कि अब इंडेक्स फंड्स और ETFs जैसे पैसिव प्रोडक्ट्स में से बड़ा हिस्सा ICICI Bank के पास जाएगा। यह 'स्ट्रक्चरल बाइंग' स्टॉक के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह काम करती है, जिससे बाजार की अस्थिरता के बीच भी वैल्यूएशन स्थिर बनी रहती है।
अब आगे क्या?
फिलहाल निफ्टी में बैंकिंग सेक्टर का वेटेज 36% से ज्यादा है, जिससे पूरे इंडेक्स पर इनका गहरा प्रभाव पड़ता है। निवेशकों की नजर अब HDFC Bank के लीडरशिप सक्सेशन प्लान पर टिकी है। वहीं, ICICI Bank के लिए अपनी रिटेल लोन ग्रोथ और मार्जिन को बनाए रखना सबसे जरूरी होगा, ताकि वह इंडेक्स में अपनी पकड़ और मजबूत कर सके।
