ICICI Bank ने Reserve Bank of India की फॉरेन करेंसी स्वैप विंडो के जरिए **$17.88 बिलियन** की बड़ी राशि जुटाई है। बैंक ने इस फंड का इस्तेमाल इंटरनेशनल लोन और गारंटी के लिए किया है, साथ ही डिपॉजिट रेट्स में **310 बेसिस पॉइंट्स** की बड़ी कटौती की है।
भारी भरकम फंड और उसका मैनेजमेंट
Reserve Bank of India (RBI) की स्पेशल फॉरेन करेंसी स्वैप फैसिलिटी के तहत ICICI Bank ने $17.88 बिलियन के FCNR डिपॉजिट जुटाए हैं। इस फैसिलिटी का मकसद बैंकिंग सिस्टम में विदेशी मुद्रा की लिक्विडिटी बढ़ाना था। जबरदस्त रिस्पॉन्स के कारण RBI ने इस विंडो को तय समय से पहले, यानी 31 अगस्त 2026 को ही बंद कर दिया।
बैंक ने जुटाई गई पूंजी का आक्रामक इस्तेमाल किया है। रेगुलेटरी फाइलिंग के मुताबिक, बैंक ने करीब $9 बिलियन का लोन अपनी इंटरनेशनल ब्रांचों और सब्सिडियरीज के जरिए बांटा है। इसके अलावा, ट्रेड और क्रेडिट एक्टिविटी को सपोर्ट करने के लिए $3.63 बिलियन के स्टैंडबाय लेटर्स ऑफ क्रेडिट और गारंटी जारी किए हैं। जुलाई और अगस्त के बीच बैंक ने $3.55 बिलियन के USD बॉन्ड भी इश्यू किए थे।
ब्याज दरों में बड़ा बदलाव
अब जब RBI की स्वैप विंडो बंद हो चुकी है, बैंक मार्केट-बेस्ड बोरिंग पर शिफ्ट हो रहे हैं। ICICI Bank ने अपनी 5-साल की USD FCNR(B) डिपॉजिट इंटरेस्ट रेट को 6.00% से घटाकर 2.90% कर दिया है। यानी सीधे 310 बेसिस पॉइंट्स की कटौती की गई है। यह कदम बताता है कि बैंक अब अपनी कॉस्ट ऑफ फंड्स को कम करने पर जोर दे रहा है।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
इन्वेस्टर्स के लिए यह ट्रांजिशन काफी महत्वपूर्ण है। जहां एक तरफ बैंक का इंटरनेशनल क्रेडिट पोर्टफोलियो मजबूत हुआ है, वहीं सब्सिडी वाली स्वैप सुविधा खत्म होने के बाद प्रॉफिटेबिलिटी बनाए रखना एक चुनौती है। अब निवेशकों की नजर बैंक के नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIMs) पर रहेगी कि आने वाली तिमाहियों में बैंक अपनी इंटरनेशनल लेंडिंग बुक को कैसे मैनेज करता है।
