विदेश में डेबिट कार्ड से खर्च पर बढ़ेगी चपत
ICICI Bank अपने ग्राहकों को विदेश में डेबिट कार्ड से पेमेंट करने पर पहले से ज्यादा शुल्क लेने की तैयारी में है। बैंक 21 जून, 2026 से डायनामिक करेंसी कन्वर्जन (DCC) पर लगने वाले शुल्क को बढ़ाकर 3.5% कर देगा, जो कि मौजूदा 1% से काफी ज्यादा है। यह शुल्क तब लगता है जब आप विदेश में खरीदारी करते समय पेमेंट के लिए भारतीय रुपये (INR) का ऑप्शन चुनते हैं।
मौजूदा शुल्क भी ग्राहकों के लिए चिंता का विषय था, लेकिन इस नई बढ़ोतरी से यह चार्ज लगभग चार गुना हो जाएगा। इसका मतलब है कि अब से विदेश में लोकल करेंसी में पेमेंट करना ग्राहकों के लिए ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकता है। बैंक का यह कदम अंतरराष्ट्रीय लेनदेन से अपनी कमाई बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
हालांकि DCC की सुविधा से ग्राहक ट्रांजेक्शन का अमाउंट तुरंत रुपये में देख सकते हैं, लेकिन 3.5% का यह नया शुल्क इस सुविधा को महंगा बना देगा।
प्रतिस्पर्धियों की राह पर ICICI Bank?
बैंक अपने शुल्क नियमित रूप से बाजार की स्थितियों के अनुसार बदलते रहते हैं। ICICI Bank द्वारा की गई यह बढ़ोतरी भले ही बड़ी लगे, लेकिन यह देखना अहम होगा कि यह अन्य बैंकों के मुकाबले कहां ठहरती है। कई बैंक नॉन-DCC ट्रांजेक्शन पर 2% से 3.5% तक का फॉरेन ट्रांजेक्शन शुल्क लेते हैं। ICICI Bank के DCC शुल्क का असल असर इस बात पर निर्भर करेगा कि कितने ग्राहक पेमेंट के समय रुपये में कन्वर्ट करने का ऑप्शन चुनते हैं।
कुछ बैंक ऐसे भी हैं जो अंतरराष्ट्रीय ट्रांजेक्शन पर कोई शुल्क नहीं लेते या फिर खास ट्रैवल कार्ड ऑफर करते हैं जिनमें बेहतर एक्सचेंज रेट और कम शुल्क होता है। मौजूदा आर्थिक माहौल में, जहां लोग खर्चों को लेकर सतर्क हैं, ऐसे शुल्क बढ़ोतरी ग्राहकों की लॉयल्टी पर असर डाल सकती है।
ग्राहकों पर असर और चिंताएं
DCC शुल्क में यह वृद्धि ग्राहकों के बीच नाराजगी पैदा कर सकती है। ग्राहकों के लिए सबसे बड़ी चिंता यह होगी कि विदेश में खरीदारी, ऑनलाइन सब्सक्रिप्शन या बार-बार होने वाले अंतरराष्ट्रीय पेमेंट्स पर कुल लागत काफी बढ़ जाएगी। 3.5% का अतिरिक्त शुल्क ट्रांजेक्शन की कुल राशि में तेजी से इजाफा कर देगा।
इस बदलाव के कारण कुछ ग्राहक बेहतर अंतरराष्ट्रीय ट्रांजेक्शन दरों वाले दूसरे बैंकों या क्रेडिट कार्ड की तलाश कर सकते हैं। DCC की सुविधा का आकर्षण इस भारी बढ़ोतरी के कारण काफी कम हो जाएगा।
अगर ग्राहकों को लगता है कि बैंक अपनी कमाई बढ़ाने के लिए उनके हितों को नजरअंदाज कर रहा है, तो इससे बैंक की प्रतिष्ठा और ग्राहकों के विश्वास को नुकसान पहुंच सकता है। ऐसे में, ग्राहक जिन्होंने विदेश में ज्यादा ट्रांजेक्शन करते हैं, वे बैंक से दूर जा सकते हैं। यह भी संभव है कि इस तरह के शुल्क ढांचे पर भविष्य में नियामकों की नजर पड़े।
