ICICI Bank को GST अधिकारियों से **₹229.14 करोड़** का टैक्स नोटिस मिला है। यह मामला मिनिमम अकाउंट बैलेंस से जुड़ी सेवाओं पर टैक्स लगाने को लेकर है। बैंक ने इस दावे को चुनौती देने का फैसला किया है।
विवाद की जड़ क्या है?
30 सितंबर, 2026 को ICICI Bank को CGST और सेंट्रल एक्साइज, मुंबई ईस्ट के एडिशनल कमिश्नर से यह 'शो कॉज नोटिस' मिला है। अधिकारियों का तर्क है कि बैंक द्वारा मिनिमम अकाउंट बैलेंस मेंटेन न करने पर जो फीस वसूली जाती है, वह GST के दायरे में आती है।
बैंक का रुख और कानूनी स्थिति
यह कोई पहला मौका नहीं है जब बैंक टैक्स विवाद में फंसा है। बैंक पहले से ही इसी तरह के कई टैक्स मामलों में कानूनी लड़ाई लड़ रहा है। मैनेजमेंट का साफ कहना है कि वे तय समयसीमा के भीतर इसका औपचारिक जवाब दाखिल करेंगे। बैंक पुराने तर्कों का सहारा लेगा, जो पहले से ही कोर्ट में चल रहे मामलों में रखे गए हैं।
निवेशकों के लिए क्या हैं मायने?
यह मामला बैंक की 'मटेरियलिटी थ्रेशोल्ड' (Materiality Threshold) से बड़ा है, इसीलिए SEBI के नियमों के तहत बैंक ने इसकी जानकारी नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) को दी है।
निवेशकों के लिए चुनौती यह है कि अगर कानूनी लड़ाई बैंक के पक्ष में नहीं रही, तो भविष्य में बैंक को न केवल मुख्य राशि बल्कि ब्याज और जुर्माने का भी बोझ उठाना पड़ सकता है। यह पूरा विवाद बैंकिंग सेक्टर में सर्विस चार्जेस पर टैक्स की व्याख्या को लेकर चल रही एक बड़ी बहस का हिस्सा है, जिस पर मार्केट की नजर बनी रहेगी।
