ICICI AMC ने मार्केट को पछाड़ा, AUM में 25.6% की छलांग!
ICICI Prudential Asset Management Company (AMC) ने भारतीय एसेट मैनेजमेंट सेक्टर में अपनी धाक जमा ली है। कंपनी के एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) में पिछले साल की तुलना में 25.6% की जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है और यह ₹11 लाख करोड़ के आंकड़े को पार कर गया है। यह ग्रोथ रेट भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री की 12.2% की ग्रोथ से काफी ज्यादा है, जिसने फाइनेंशियल ईयर 26 में ₹73.73 लाख करोड़ का कुल AUM दर्ज किया।
हालांकि, Q4 FY26 के लिए कंपनी का नेट प्रॉफिट 10.4% बढ़कर ₹763 करोड़ रहा, लेकिन इस पर ट्रेजरी और सीड कैपिटल पर हुए मार्क-टू-मार्केट (MTM) लॉस का असर दिखा। वहीं, कंपनी के कोर ऑपरेटिंग प्रॉफिट में 30.2% की शानदार बढ़ोतरी हुई, जो इसके मुख्य बिजनेस की मजबूती को दर्शाता है। कंपनी के ऑपरेशंस से कुल रेवेन्यू 23.1% बढ़कर ₹5,765 करोड़ हो गया, जबकि ऑपरेटिंग प्रॉफिट 28.9% बढ़कर ₹4,171 करोड़ दर्ज किया गया।
फीस पर दबाव के बीच मुनाफे को बढ़ाने की रणनीति
जैसे-जैसे पैसिव AUM 48.3% की दर से बढ़ रहा है, फीस कम होने का खतरा भी बढ़ रहा है। इसे देखते हुए ICICI AMC हाई-मार्जिन वाले क्षेत्रों पर फोकस कर रही है। हाल ही में ICICI Venture का इंटीग्रेशन किया गया है, जिससे ₹4,620 करोड़ की कमिटेड फंड्स जुड़ गई हैं, जो हाई-मार्जिन एसेट्स जोड़ने में मदद करेगा। इसके अलावा, कंपनी GIFT City में 'स्मार्ट नेविगेटर फंड' जैसे इनिशिएटिव और दुबई में एक डेडिकेटेड टीम के साथ अपने ग्लोबल फुटप्रिंट का विस्तार कर रही है।
डिजिटल पहलों से SIP में रिकॉर्ड इनफ्लो
सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) एसेट मैनेजर्स के लिए काफी अहम है, और ICICI AMC के SIP बुक में मजबूत ग्रोथ देखी जा रही है। मार्च 2026 में मासिक SIP इन्वेस्टमेंट 30.5% बढ़कर ₹5,104 करोड़ तक पहुंच गया। इस ग्रोथ का एक बड़ा कारण नए निवेशकों का डिजिटल और फिनटेक प्लेटफॉर्म से जुड़ना है, जो 50-60% तक नए कस्टमर्स को एक्वायर कर रहा है। ये 'डिजिटल नेटिव्स', जो अक्सर पहली बार निवेश कर रहे होते हैं, म्यूचुअल फंड्स को धन बनाने का एक महत्वपूर्ण जरिया मानते हैं। इस डिजिटल एक्विजिशन स्ट्रैटेजी से ICICI AMC के यूनिक कस्टमर्स की संख्या बढ़कर 17 मिलियन हो गई है।
मार्केट पोजिशन और वैल्यूएशन
ICICI AMC के पास कुल म्यूचुअल फंड मार्केट का 15.5% शेयर है और यह एक्टिव इक्विटी जैसे हाई-ग्रोथ वाले क्षेत्रों में लीड कर रहा है। इसकी इक्विटी और इक्विटी-ओरिएंटेड स्कीम्स का AUM ₹6.2 लाख करोड़ है, जिसमें 14.2% मार्केट शेयर है। वहीं, SBI Mutual Fund का AUM लगभग ₹12.63 लाख करोड़ (दिसंबर 2025 तक) और Nippon India Mutual Fund का ₹7.40 लाख करोड़ (मार्च 2026 तक) है। HDFC AMC का P/E रेशियो 32x से 41x के बीच है, जबकि ICICI AMC का TTM P/E रेशियो लगभग 49-50x और फॉरवर्ड P/E 41-42x के आसपास है, जो प्रीमियम वैल्यूएशन को दर्शाता है। कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग ₹1.66 लाख करोड़ है। ICICI AMC ने FY26 के लिए ₹12.40 प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड भी घोषित किया है।
आगे की चुनौतियाँ और जोखिम
मजबूत ऑपरेशनल परफॉर्मेंस के बावजूद, ICICI AMC को चुनौतीपूर्ण इकोनॉमी का सामना करना पड़ रहा है। मार्च 2026 में मार्केट में काफी उतार-चढ़ाव देखा गया, जिससे इंडस्ट्री में ₹2.39 लाख करोड़ का नेट आउटफ्लो हुआ, खासकर डेट फंड्स से। मिडिल ईस्ट टेंशन और तेल की बढ़ती कीमतों की चिंताओं के बीच फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) इक्विटी बेच रहे हैं। BNP Paribas ने 2026 के लिए निफ्टी टारगेट 25,500 कर दिया है, जो हाई एनर्जी प्राइस के कारण इकोनॉमिक और अर्निंग्स प्रेशर की चेतावनी दे रहा है। हालांकि ICICI AMC का कोर ऑपरेटिंग प्रॉफिट मजबूत है, लेकिन Q4 FY26 में देखे गए MTM लॉस इसके नेट प्रॉफिट को प्रभावित कर सकते हैं। ICICI Venture का इंटीग्रेशन कॉम्प्लेक्सिटी बढ़ा सकता है। आने वाले TER नॉर्म्स इंडस्ट्री की फीस को कम कर सकते हैं, जिसके लिए लगातार एफिशिएंसी सुधार की जरूरत होगी।