इंश्योरेंस ब्रोकर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (IBAI) ने IRDAI के उस नए प्रस्ताव पर चिंता जताई है जिसमें कमीशन कैप और मैनेजमेंट खर्च को घटाने की बात कही गई है। एसोसिएशन का कहना है कि इससे इंडस्ट्री की ग्रोथ रुक सकती है और रोजगार पर भी संकट आ सकता है।
बीमा क्षेत्र के लिए रेगुलेटर IRDAI का हालिया कंसल्टेशन पेपर चर्चा का विषय बना हुआ है। इसमें 30 से ज्यादा अलग-अलग कमीशन कैप्स और इंश्योरेंस कंपनियों के लिए मैनेजमेंट खर्च की सीमा घटाने का प्रस्ताव है। IBAI, जो 798 सदस्य फर्मों का प्रतिनिधित्व करता है, ने इस कदम को पूरी तरह से नकारते हुए कहा है कि यह स्वतंत्र ब्रोकर्स के लिए अपना बिजनेस चलाना मुश्किल कर देगा।
निवेशकों के लिए क्या है दांव पर?
निवेशकों के नजरिए से यह मामला काफी पेचीदा है। एक तरफ, अगर कमीशन पर सख्ती आती है, तो बीमा कंपनियों का ऑपरेटिंग खर्च कम हो सकता है और शॉर्ट टर्म में मार्जिन सुधर सकता है। लेकिन दूसरी तरफ, इसका सबसे बड़ा रिस्क 'डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क' का सिकुड़ना है। अगर ब्रोकर्स का मुनाफा घटेगा, तो वे छोटे शहरों में अपनी सेवाएं कम कर सकते हैं, जिससे नई पॉलिसी की बिक्री और कंपनियों की मार्केट हिस्सेदारी पर बुरा असर पड़ेगा।
रेगुलेटरी अस्थिरता का डर
IBAI ने यह भी याद दिलाया है कि इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन का मौजूदा ढांचा 2023 में ही अपडेट किया गया था और इंडस्ट्री को उम्मीद थी कि यह 2028 तक स्थिर रहेगा। एसोसिएशन का कहना है कि इतनी जल्दी बदलाव से मार्केट में अनिश्चितता पैदा होगी। साथ ही, खर्च की सीमा घटने से क्लेम प्रोसेसिंग, कस्टमर सर्विस और सेल्स डिपार्टमेंट्स में छंटनी (Job cuts) का भी खतरा बढ़ गया है।
अब सबकी नजरें IRDAI के अंतिम नोटिफिकेशन पर हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या रेगुलेटर इंडस्ट्री की इन आपत्तियों को स्वीकार करता है या फिर अपने कड़े रुख पर कायम रहता है।
