क्या आपके भी कुछ पैसे बैंकों या म्यूचुअल फंड में फंसे हुए हैं? अब आप RBI के UDGAM पोर्टल और SEBI से जुड़े माध्यमों से इन निष्क्रिय खातों और निवेशों को आसानी से ट्रैक कर सकते हैं। लेकिन सावधान रहें, इन पैसों को वापस पाने की प्रक्रिया में आपको सीधे वित्तीय संस्थानों से संपर्क करना होगा और धोखेबाज़ रिकवरी एजेंटों से बचना होगा।
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भूल गए थे निवेश? अब वापस पाएं!
कभी-कभी काम बदलते, घर बदलते या संपर्क जानकारी अपडेट न होने के कारण हमारे पैसे बैंकों या निवेशों में निष्क्रिय (dormant) हो जाते हैं। लेकिन अब चिंता की कोई बात नहीं! भारत के रेगुलेटर्स ने ऐसे भूले हुए पैसों को खोजने और वापस पाने के लिए खास डिजिटल रास्ते खोल दिए हैं।
RBI का UDGAM पोर्टल: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने UDGAM (Unclaimed Deposits – Gateway to Access inforMation) नाम से एक पोर्टल लॉन्च किया है। इसके ज़रिए आप कई बैंकों में पड़े अपने लावारिस (unclaimed) डिपॉज़िट्स का पता लगा सकते हैं। अगर कोई बैंक अकाउंट या फिक्स्ड डिपॉज़िट 10 साल तक इस्तेमाल नहीं होता, तो उसका पैसा डिपॉजिटर एजुकेशन एंड अवेयरनेस फंड में चला जाता है। लेकिन असली मालिक या उनके कानूनी वारिस उस पैसे पर अपना दावा कर सकते हैं।
निष्क्रिय म्यूचुअल फंड और शेयर्स का क्या करें?
बैंक डिपॉज़िट्स के अलावा, पुराने म्यूचुअल फंड (mutual fund) या फिजिकल शेयर सर्टिफिकेट्स में भी काफी पैसा फंसा रह सकता है। SEBI ऐसे निष्क्रिय म्यूचुअल फंड की पहचान करने में मदद करता है, जिन्हें आमतौर पर 10 साल से कोई ट्रांजेक्शन नहीं हुआ हो। इन्हें वापस पाने के लिए आपको सीधे संबंधित एसेट मैनेजमेंट कंपनी (AMC) या उनके रजिस्ट्रार एंड ट्रांसफर एजेंट (RTA) से संपर्क करना होगा। सबसे पहले अपना KYC (Know Your Customer) अपडेट करवाना ज़रूरी है। इसी तरह, अगर आपके पास पुराने शेयर सर्टिफिकेट्स या रुके हुए डिविडेंड वारंट्स हैं, तो आपको कंपनी के RTA या उस डिपॉजिटरी पार्टिसिपेंट से बात करनी चाहिए जहां आपके शेयर रखे हैं।
नॉमिनी और वारिस की भूमिका
अगर किसी रिश्तेदार की मृत्यु हो गई है, तो उनके वित्तीय संपत्ति (financial assets) का पता लगाना कानूनी वारिसों की एक अहम ज़िम्मेदारी है। ऐसे में प्रोविडेंट फंड (PF) खाते, बीमा पॉलिसियां और निवेश फोलियो की जांच करनी चाहिए। इसके लिए मृत्यु प्रमाण पत्र और रिश्ते का सबूत जैसे ज़रूरी दस्तावेज़ जमा कराने होंगे। बेहतर होगा कि आप अपने सभी वित्तीय खातों की एक लिस्ट बनाकर किसी भरोसेमंद परिवार के सदस्य को दे दें, ताकि भविष्य में संपत्ति को खोजना आसान हो।
रिकवरी घोटालों से ऐसे बचें
आजकल पैसे वापस दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले एजेंटों का खतरा बढ़ गया है। इसलिए, किसी भी अनजान व्यक्ति या वेबसाइट को अपना OTP, पासवर्ड या बैंक अकाउंट की पूरी जानकारी न दें। सरकारी और रेगुलेटरी काम सीधे अधिकृत वित्तीय संस्थानों या सरकारी पोर्टल्स के ज़रिए ही होते हैं। अगर कोई एजेंसी आपसे पैसे वसूलने के बदले फीस मांगे, तो समझ जाएं कि यह एक घोटाला हो सकता है। कोई भी व्यक्तिगत या वित्तीय जानकारी देने से पहले RBI या SEBI की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर उसकी सच्चाई ज़रूर जांच लें। अपनी संपर्क जानकारी और नॉमिनी डिटेल्स को समय-समय पर अपडेट रखना ही अपनी संपत्ति को सुरक्षित रखने का सबसे अच्छा तरीका है।
