आपका CIBIL स्कोर 750 से ऊपर है, फिर भी होम लोन रिजेक्ट हो सकता है। बैंक केवल क्रेडिट स्कोर नहीं, बल्कि आपके डेट-टू-इनकम रेश्यो, नौकरी की स्टेबिलिटी और प्रॉपर्टी के कानूनी दस्तावेजों की बारीकी से जांच करते हैं।
बहुत से लोग यह मान लेते हैं कि अगर उनका CIBIL स्कोर 750 या उससे अधिक है, तो होम लोन मिलना पक्का है। लेकिन हकीकत में, अच्छा क्रेडिट स्कोर केवल लोन प्रक्रिया का एक छोटा सा हिस्सा है। बैंक यह देखते हैं कि आप लंबी अवधि तक लोन चुकाने में कितने सक्षम हैं, जिसमें आपकी इनकम, मौजूदा कर्ज और खुद प्रॉपर्टी का स्टेटस अहम होता है।
कर्ज और इनकम का संतुलन (FOIR)
बैंक सबसे पहले 'Fixed Obligation to Income Ratio' (FOIR) चेक करते हैं। इसका मतलब है कि आपकी कुल मंथली कमाई का कितना हिस्सा पहले से ही कार लोन, पर्सनल लोन या क्रेडिट कार्ड के बिलों में जा रहा है। अगर आपकी सैलरी का बड़ा हिस्सा पहले ही EMI में कट रहा है, तो बैंक आपको लोन देने में हिचकिचाएंगे। आमतौर पर, बैंक यह देखते हैं कि आपकी कुल EMI आपकी टेक-होम सैलरी के 40 प्रतिशत से 60 प्रतिशत से ज्यादा न हो।
इनकम की स्टेबिलिटी और प्रॉपर्टी का कानूनी पक्ष
सैलरीड लोगों के लिए बैंक लगातार सैलरी क्रेडिट देखते हैं, जबकि बिजनेस करने वालों के लिए पिछले 3 सालों के ITR और ऑडिटेड फाइनेंशियल स्टेटमेंट जरूरी हैं। अगर आप बार-बार नौकरी बदल रहे हैं, तो बैंक आपसे ज्यादा डाउन पेमेंट की मांग कर सकते हैं।
इसके अलावा, प्रॉपर्टी का कानूनी ऑडिट सबसे बड़ा 'चेक' है। यदि प्रोजेक्ट RERA रजिस्टर्ड नहीं है या उसके पास जरूरी सरकारी मंजूरी (जैसे Occupation Certificate) नहीं है, तो बैंक लोन रिजेक्ट कर देगा। बैंक प्रॉपर्टी को कोलैटरल के रूप में रखता है, इसलिए वह कोई जोखिम नहीं लेना चाहता।
RBI के LTV नियम
RBI की गाइडलाइंस के अनुसार, लोन-टू-वैल्यू (LTV) रेश्यो का पालन करना अनिवार्य है:
- ₹30 लाख तक के लोन पर बैंक प्रॉपर्टी वैल्यू का 90% तक फंड कर सकते हैं।
- ₹30 लाख से ₹75 लाख के लोन पर यह सीमा 80% है।
- ₹75 लाख से ऊपर के लोन पर बैंक केवल 75% तक ही फंडिंग करते हैं।
इसका मतलब यह है कि बाकी राशि और स्टैम्प ड्यूटी का खर्च आपको अपनी बचत से देना होगा। इसलिए आवेदन से पहले अपने दस्तावेजों को दुरुस्त रखें और डाउन पेमेंट के लिए लिक्विड कैश तैयार रखें।
