सिर्फ अच्छा CIBIL स्कोर होना लोन मिलने की गारंटी नहीं है। बैंक मुख्य रूप से FOIR (Fixed Obligation to Income Ratio) को देखते हैं। अगर आपकी मौजूदा देनदारियां ज्यादा हैं या प्रॉपर्टी वैल्यूएशन में कमी है, तो आवेदन खारिज हो सकता है।
बहुत से लोग यह मानकर चलते हैं कि एक अच्छा CIBIL स्कोर उन्हें आसानी से होम लोन दिला देगा। हालांकि, कई बार शानदार क्रेडिट हिस्ट्री होने के बावजूद बैंक लोन आवेदन ठुकरा देते हैं। इसकी असल वजह यह है कि बैंक केवल आपके पुराने रिकॉर्ड को नहीं, बल्कि आपकी मौजूदा भुगतान क्षमता (Current Repayment Capacity) को भी बारीकी से परखते हैं।
लोन अप्रूवल में FOIR का खेल
लोन लेने में सबसे बड़ी बाधा 'Fixed Obligation to Income Ratio' (FOIR) है। बैंक इसके जरिए यह पता लगाते हैं कि आपकी मंथली इनकम का कितना हिस्सा पहले से ही कर्ज चुकाने में खर्च हो रहा है। होम लोन के लिए आवेदन करते समय, बैंक आपके नए EMI के साथ मौजूदा कार लोन, पर्सनल लोन और क्रेडिट कार्ड के बिलों को जोड़ते हैं।
आमतौर पर बैंक यह देखते हैं कि आपका कुल कर्ज आपकी टेक-होम सैलरी का 40% से 55% से अधिक न हो। यदि आपकी कुल देनदारियां इस सीमा को पार कर जाती हैं, तो बैंक लोन को रिस्की मानते हैं। आसान भाषा में कहें तो CIBIL स्कोर यह बताता है कि आप ईमानदार कर्जदार हैं, लेकिन FOIR यह तय करता है कि आपके पास नई EMI चुकाने के लिए पर्याप्त कैश बचेगा या नहीं।
क्यों क्रेडिट स्कोर और अफोर्डेबिलिटी अलग हैं?
आजकल 'बाय नाउ पे लेटर' (BNPL) जैसे छोटे-छोटे लोन भी बैंक की नजर में होते हैं। ये छोटे कर्ज भी आपकी उधार लेने की क्षमता को कम कर देते हैं। बढ़ती ब्याज दरों के दौर में बैंक काफी सतर्क हो गए हैं, इसलिए वे ऐसे आवेदनों को प्राथमिकता देते हैं जो आर्थिक रूप से सुरक्षित दिखते हैं।
प्रॉपर्टी का मूल्यांकन और कानूनी जांच
लोन रिजेक्ट होने का एक कारण आपकी जेब नहीं, बल्कि खुद वह प्रॉपर्टी भी हो सकती है। बैंक प्रॉपर्टी के कानूनी कागज, बिल्डिंग प्लान की मंजूरी और उसकी वर्तमान मार्केट वैल्यू की जांच करते हैं। अगर बैंक द्वारा किया गया प्रॉपर्टी का मूल्यांकन आपकी डिमांड से कम निकलता है, तो बैंक लोन राशि घटा देते हैं या आवेदन खारिज कर देते हैं। साथ ही, आपकी घोषित आय और बैंक स्टेटमेंट के बीच का अंतर भी सीधे रिजेक्शन का कारण बन सकता है।
लोन एलिजिबिलिटी कैसे बढ़ाएं?
बार-बार अलग-अलग बैंकों में आवेदन करने के बजाय, अपनी मौजूदा देनदारियों को कम करने पर ध्यान दें। छोटे और महंगे पर्सनल लोन चुकाने से आपका FOIR कम हो जाएगा, जिससे नई EMI का बोझ बैंक को सही लगने लगेगा। आप डाउन पेमेंट (Down Payment) बढ़ाकर भी लोन की राशि कम कर सकते हैं, जिससे आपकी एलिजिबिलिटी सुधर सकती है। आवेदन करने से पहले सुनिश्चित करें कि आपके सभी पुराने लोन क्लोज्ड के रूप में रिपोर्ट हो रहे हैं ताकि कोई कंफ्यूजन न हो।
