जुलाई **2026** में होम लोन लेने वालों के लिए खुशखबरी है। पब्लिक सेक्टर के बैंक **7.10%** से शुरू होने वाली ब्याज दरों पर होम लोन दे रहे हैं। ये दरें आरबीआई के **5.25%** रेपो रेट से प्रभावित हैं, लेकिन आपकी क्रेडिट प्रोफाइल के आधार पर इनमें अंतर आ सकता है।
होम लोन की ब्याज दरों में बड़ी राहत
जुलाई 2026 में घर खरीदने का सपना देख रहे लोगों के लिए अच्छी खबर है। सरकारी बैंकों (Public Sector Banks) ने होम लोन की ब्याज दरों को घटाकर 7.10% तक ला दिया है। यह कमी आरबीआई (RBI) के 5.25% पर स्थिर रेपो रेट (Repo Rate) का सीधा असर है। रेपो रेट वह दर है जिस पर केंद्रीय बैंक, वाणिज्यिक बैंकों को पैसा उधार देता है। इसके स्थिर रहने से बैंकों के लिए फंड की लागत कम हो जाती है, जिससे वे ग्राहकों को कम ब्याज दरों पर लोन दे पाते हैं।
प्रमुख बैंकों में ब्याज दरों की तुलना
ब्याज दरों के मामले में सरकारी बैंक सबसे आगे हैं। बैंक ऑफ महाराष्ट्र (Bank of Maharashtra) और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया (Central Bank of India) 7.10% की शुरुआती दरें पेश कर रहे हैं। बैंक ऑफ महाराष्ट्र की दरें 9.90% तक जाती हैं, जबकि सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया 9.15% तक का ऑफर दे रहा है। वहीं, बैंक ऑफ इंडिया (Bank of India), यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (Union Bank of India), यूको बैंक (UCO Bank) और इंडियन बैंक (Indian Bank) जैसे सरकारी बैंक भी 7.10% से 7.15% के बीच शुरुआती दरें दे रहे हैं।
प्राइवेट सेक्टर के बैंक और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां थोड़ी ऊंची ब्याज दरें दे रही हैं। एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस (LIC Housing Finance) 7.15% से लोन शुरू कर रहा है, जबकि साउथ इंडियन बैंक (South Indian Bank) 7.20% पर है। फेडरल बैंक (Federal Bank), एचएसबीसी बैंक (HSBC Bank), आईसीआईसीआई बैंक (ICICI Bank) और कोटक महिंद्रा बैंक (Kotak Mahindra Bank) 7.35% से 7.50% के बीच प्रतिस्पर्धी ऑफर दे रहे हैं। बजाज हाउसिंग फाइनेंस (Bajaj Housing Finance) और पीएनबी हाउसिंग फाइनेंस (PNB Housing Finance) जैसी नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियां भी 7.50% से शुरुआत कर रही हैं।
लोन की लागत पर असर डालने वाले कारक
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि ये शुरुआती दरें सबसे योग्य ग्राहकों के लिए होती हैं। आपको मिलने वाली वास्तविक ब्याज दर आपकी क्रेडिट रिपोर्ट (Credit Score), आय की स्थिरता, नौकरी के प्रोफाइल और मौजूदा कर्ज पर निर्भर करती है। 800 या उससे अधिक का क्रेडिट स्कोर अच्छी ब्याज दर पाने के लिए जरूरी है।
इसके अलावा, लोन-टू-वैल्यू (Loan-to-Value) रेशियो भी एक अहम भूमिका निभाता है। प्रॉपर्टी की कुल कीमत के मुकाबले अगर आप ज्यादा लोन लेते हैं, तो बैंक जोखिम को देखते हुए आपसे थोड़ी ज्यादा ब्याज दर वसूल सकता है। सैलरीड और सेल्फ-एम्प्लॉयड (Self-employed) ग्राहकों के लिए नियम और दरें थोड़ी अलग हो सकती हैं।
लोन लेते समय प्रोसेसिंग फीस (Processing Fees) और बीमा (Insurance) जैसी छिपी लागतों पर भी ध्यान देना चाहिए, क्योंकि ये आपके होम लोन की कुल लागत को बढ़ा सकती हैं।
