Hikal में आज एक अहम वोटिंग हो रही है, जिससे यह तय होगा कि क्या समीर हिरेमथ कंपनी के नए चेयरमैन बनेंगे। यह फैसला हिरेमथ और कल्याणी परिवार के बीच जारी विवाद के बीच काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिसमें रिटेल और इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स की भूमिका निर्णायक होगी।
निर्णायक मोड़ पर Hikal की लीडरशिप
Hikal Limited में आज का दिन बेहद अहम है। कंपनी के मौजूदा वाइस-चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर, समीर हिरेमथ, अपने पिता जय हिरेमथ के पद छोड़ने के बाद चेयरमैन बनने की रेस में हैं। यह मौका इसलिए भी खास है क्योंकि यह स्पेशलिटी केमिकल्स और फार्मा कंपनी एक लंबे समय से हिरेमथ और कल्याणी परिवारों के कानूनी विवाद के बीच फंसी हुई है।
वोटिंग का गणित (The Power Play)
कंपनी की ओनरशिप स्ट्रक्चर के कारण यह वोटिंग दिलचस्प हो गई है। हिरेमथ गुट के पास लगभग 35% वोटिंग पावर है, जबकि कल्याणी समूह के पास करीब 34% हिस्सेदारी है। इस बराबरी के खेल में 31% पब्लिक शेयरहोल्डर्स की भूमिका सबसे बड़ी है। इसमें ICICI Prudential Fund और Tata Mutual Fund जैसे बड़े इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स के पास काफी बड़ा हिस्सा है, जो इस डेडलॉक को खत्म कर सकते हैं। इसके नतीजे गुरुवार को घोषित किए जाएंगे।
प्रॉक्सी फर्मों के अलग-अलग राय
चेयरमैनशिप के इस प्रस्ताव पर प्रॉक्सी एडवाइजरी फर्मों के बीच खींचतान है। Institutional Investor Advisory Services और SES ने इस नियुक्ति के समर्थन में वोट करने की सलाह दी है, जिनका तर्क है कि समीर हिरेमथ का अनुभव कंपनी के लिए बेहतर होगा।
इसके उलट, InGovern ने इस प्रस्ताव के खिलाफ वोट करने की सलाह दी है। उनका कहना है कि चेयरमैन और एमडी के पदों को एक साथ मिलाना कॉर्पोरेट गवर्नेंस के नजरिए से रिस्की है, क्योंकि इससे कंपनी में 'चेक एंड बैलेंस' कम हो जाता है।
पारिवारिक विवाद का असर
इन्वेस्टर्स इस वोटिंग पर इसलिए भी नजर रख रहे हैं क्योंकि यह विवाद उस बड़ी कानूनी लड़ाई का हिस्सा है, जिसमें ₹1 लाख करोड़ से ज्यादा की संपत्ति दांव पर लगी है और मामला सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर मीडिएशन के जरिए सुलझाया जा रहा है। अब निवेशकों को नतीजों का इंतजार है, जिससे यह स्पष्ट होगा कि भविष्य में कंपनी की लीडरशिप और गवर्नेंस की दिशा क्या होगी।
